राजस्थान के शाहपुरा जिले (पूर्व में भीलवाड़ा) के फूलियाकलां में शिक्षा और खेल के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व मिसाल कायम हुई है। भामाशाह सत्यनारायण लड्ढा ने गांव के उस सरकारी स्कूल की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है, जहां उन्होंने कभी पेड़ की छांव में पढ़ाई की थी। आईआईएम कोलकाता से शिक्षा प्राप्त कर चुके लड्ढा ने जब अपने पुराने विद्यालय की जर्जर हालत देखी, तो उन्होंने इसे संवारने का दृढ़ संकल्प लिया। इस विश्वस्तरीय प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए उन्होंने जयपुर स्थित अपना बंगला और फैक्ट्री तक बेच दी और निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न करते हुए सरकार द्वारा दिए गए 1.79 करोड़ रुपये भी वापस लौटा दिए। इस कार्य में अमेरिका में कार्यरत उनके बेटे और दो बेटियों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है।

आठ बीघा जमीन पर तैयार हो रहे इस प्रोजेक्ट के तहत 2000 बच्चों के पढ़ने की उत्कृष्ट व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान में 48 कमरे बनकर तैयार हैं, जिनमें से 16 को आधुनिक स्मार्ट पैनल से लैस किया गया है। बच्चों को भविष्य की तकनीक से जोड़ने के लिए रोबोटिक स्टीम एजुकेशन प्लेटफॉर्म और विशेष स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम संचालित किए जाएंगे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए पूरे परिसर में 64 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। लड्ढा का परिवार आगामी दस वर्षों तक इस पूरे परिसर की देखरेख का जिम्मा स्वयं संभालेगा।
ग्रामीण प्रतिभाओं के बीच हॉकी के भारी उत्साह को देखते हुए यहां सात करोड़ रुपये की लागत से एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का ‘सैंड सिंथेटिक टर्फ’ मैदान भी तैयार किया गया है। पिच एक्सपर्ट विक्रम के अनुसार, इसके लिए विशेष नीले रंग का टर्फ वियतनाम से मंगवाया गया है। यह उत्तर भारत का ऐसा एकमात्र टर्फ है जिसे अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) से मान्यता मिली है। सैंड इनफिलिंग तकनीक से बने इस मैदान का रखरखाव बेहद आसान है और यहां डे-नाइट मैचों के लिए आधुनिक फ्लड लाइटें भी लगाई गई हैं। इन विश्वस्तरीय सुविधाओं के बाद अब फूलियाकलां के इस सरकारी स्कूल के मैदान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोफेशनल हॉकी मैच भी आसानी से आयोजित किए जा सकेंगे।