SOG का महा-एक्शन: राजस्थान में ‘फर्जी दिव्यांग’ बनकर सरकारी नौकरी पाने वाले 44 अभ्यर्थी बेनकाब

राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने की अंधी दौड़ में नैतिकता को ताक पर रखकर ‘फर्जी दिव्यांग’ बनने का एक संगठित और चौंकाने वाला खेल उजागर हुआ है। स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने अपनी प्राथमिक जांच में 10 अलग-अलग बड़ी भर्ती परीक्षाओं में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के जरिए प्रवेश पाने वाले 44 अभ्यर्थियों को दोषी पाया है।

मेडिकल बोर्ड की जांच में खुली पोल

एसओजी को इस मामले में अब तक कुल 170 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 27 मामलों की जांच पूरी कर ली गई है।

  • पुनः परीक्षण: जब संदिग्ध अभ्यर्थियों का सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के मेडिकल बोर्ड से दोबारा परीक्षण कराया गया, तो सच्चाई सामने आ गई।
  • मानक से कम दिव्यांगता: अधिकांश अभ्यर्थियों की दिव्यांगता निर्धारित 40% के मानक से काफी कम पाई गई।
  • डर से भागे अभ्यर्थी: जांच की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई अभ्यर्थी तो मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित ही नहीं हुए। एसओजी के अनुसार, अभ्यर्थियों का अनुपस्थित रहना ही उनके अपराध की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त संकेत है।

इन प्रमुख भर्तियों में लगी ‘फर्जी’ सेंध

जालसाजों ने किसी एक विभाग को नहीं, बल्कि प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षाओं को निशाना बनाया है। जांच में सामने आया है कि निम्नलिखित भर्तियों में फर्जी दिव्यांग बनकर आरक्षण का अनुचित लाभ लिया गया:

  1. REET 2022 (लेवल 1 व 2)
  2. वरिष्ठ अध्यापक भर्ती
  3. स्कूल व्याख्याता (School Lecturer)
  4. ग्राम विकास अधिकारी (VDO)
  5. असिस्टेंट प्रोफेसर

“यह केवल एक धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि उन वास्तविक दिव्यांग भाई-बहनों के अधिकारों की हत्या है जो कड़ी मेहनत के बावजूद पीछे रह गए।” #### अगला निशाना: ‘सफेदपोश’ मददगार और बिचौलिए एसओजी की जांच अब केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। जांच का असली केंद्र अब वे डॉक्टर और बिचौलिए हैं, जिन्होंने चंद रुपयों के लालच में ये फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए। पुलिस अधीक्षक भवानी शंकर मीणा की रिपोर्ट पर आधिकारिक एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुसंधान की जिम्मेदारी निरीक्षक यशवंत सिंह को सौंपी गई है।

इस खुलासे के बाद प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं में भारी रोष है और वे मांग कर रहे हैं कि ऐसे ‘नकली’ दिव्यांगों को न केवल नौकरी से बर्खास्त किया जाए, बल्कि उन्हें आजीवन ब्लैकलिस्ट भी किया जाए।

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