राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए ‘दिव्यांग कोटे’ के दुरुपयोग का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। हाड़ौती क्षेत्र के चार जिलों—कोटा, बारां, झालावाड़ और बूंदी—में 23 ऐसे कर्मचारी पाए गए हैं जिन्होंने पूरी तरह स्वस्थ होने के बावजूद फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाकर सरकारी नौकरी हासिल की। दैनिक भास्कर की विशेष पड़ताल में सामने आया कि ये लोग पिछले 1 से 13 सालों से सिस्टम को चूना लगा रहे हैं।
0% दिव्यांगता, फिर भी कोटे से ‘हिट’
इस फर्जीवाड़े की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 2 कर्मचारी ऐसे मिले हैं, जिनके सुनने में रत्ती भर भी दिक्कत नहीं है (0% दिव्यांगता), लेकिन वे कागजों में 40% से ज्यादा दिव्यांग बनकर वेतन उठा रहे हैं। बाकी 21 कर्मचारियों की दिव्यांगता भी दोबारा जांच में 40% से कम पाई गई है, जो कानूनन सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं हैं।
प्रमुख बेनकाब चेहरे: यूपी और अन्य जिलों का कनेक्शन
जांच में सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जैसे जिलों से भी फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए हैं।
| नाम | पद/विभाग | जिला (सर्टिफिकेट) | पहले (%) | अब (%) |
| सुरेश कुमार यादव | जेईएन, कोटा थर्मल | आजमगढ़ (UP) | 60% | 24% |
| भंवर लाल सैनी | लाइब्रेरियन, शिक्षा विभाग | बूंदी | 45% | 0% |
| संदीप कुमार | शिक्षक, बारां | भरतपुर | 41% | 0% |
| अरुण कुमार मेहता | कृषि पर्यवेक्षक | बारां | 60% | <40% |
| आशीष मीणा | थर्ड ग्रेड शिक्षक | बारां | 60% | 30% |
शिक्षा और कृषि विभाग में सबसे ज्यादा ‘फर्जी’
पड़ताल के अनुसार, इन 23 आरोपियों में व्याख्याता, वरिष्ठ अध्यापक, कृषि पर्यवेक्षक और ग्राम विकास अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोग शामिल हैं। इनमें से 4 की तो अभी नई नियुक्ति हुई थी, जबकि 19 कर्मचारी सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें अंधता, अस्थि रोग, मानसिक रोग और श्रवण शक्ति के फर्जी दावे किए गए थे।
एसओजी (SOG) की कार्रवाई और आगे क्या?
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही एसओजी ने प्रदेशभर के 44 कर्मचारियों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी लेने का मुकदमा दर्ज किया है। अब भास्कर के इस खुलासे के बाद हाड़ौती के इन 23 कर्मचारियों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। विभाग जल्द ही इनके दस्तावेजों की फिर से जांच कर सेवा समाप्ति की कार्रवाई शुरू कर सकता है।
“अच्छे-खासे फिट लोगों ने दिव्यांगों का हक मारा है। यह न केवल कानूनी अपराध है बल्कि उन वास्तविक दिव्यांगों के साथ अन्याय है जो सालों से मेहनत कर रहे हैं।” – हाड़ौती प्रशासनिक सूत्र
