राजस्थान में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का नया दौर: भजनलाल सरकार खत्म करेगी ‘इंस्पेक्टर राज’, छोटे उद्योगों को मिलेगी बड़ी राहत

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राजस्थान में निवेश को बढ़ावा देने और छोटे उद्यमियों की राह आसान करने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए एक व्यापक सुधार पैकेज तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा है। इस नए प्लान के तहत भूमि उपयोग, निर्माण अनुमति, लाइसेंसिंग और निरीक्षण की पूरी व्यवस्था को ‘भरोसे’ पर आधारित बनाया जा रहा है।

‘जो प्रतिबंधित नहीं, वह स्वतः मान्य’

प्रस्ताव का सबसे क्रांतिकारी बिंदु यह है कि अब ‘नेगेटिव लिस्ट’ (प्रतिबंधित सूची) के बाहर आने वाले सभी कार्यों को स्वतः वैध माना जाएगा। यानी, यदि कोई कार्य स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित नहीं है, तो उसके लिए व्यापारियों को अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।

भेजे गए प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु:

  • भूमि उपयोग में सरलता: खेती की जमीन को व्यावसायिक उपयोग में लाने के लिए बार-बार अनुमति का चक्कर खत्म होगा। तय फीस देकर सीधे काम शुरू किया जा सकेगा।
  • सिंगल विंडो सिस्टम: यदि तय समय सीमा के भीतर किसी विभाग ने मंजूरी नहीं दी, तो उसे ‘डीम्ड अप्रूवल’ (स्वतः अनुमति) मान लिया जाएगा।
  • लाइफटाइम रजिस्ट्रेशन: दुकानों और शोरूम्स के लिए बार-बार नवीनीकरण का झंझट खत्म होगा। सूचना के आधार पर आजीवन वैधता वाला रजिस्ट्रेशन मिलेगा और प्रतिष्ठान 24 घंटे खुले रह सकेंगे।
  • इंस्पेक्टर राज का अंत: होटल, स्पा, सैलून और सामाजिक आयोजनों के लिए अलग-अलग लाइसेंस लेने की व्यवस्था खत्म होगी। MSME इकाइयां अब केवल सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर अपना काम शुरू कर सकेंगी।

फायर सेफ्टी और निर्माण नियमों में ढील

सरकार फायर सेफ्टी के नियमों को व्यावहारिक बनाने जा रही है। बिल्डिंग की ऊंचाई से जुड़े पुराने और अव्यावहारिक प्रतिबंधों को हटाया जाएगा। साथ ही, इंडस्ट्रियल एरिया में ‘कॉमन फायर इंफ्रास्ट्रक्चर’ विकसित करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे छोटे उद्योगों पर सुरक्षा का आर्थिक बोझ कम होगा।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

उद्योग विभाग के आयुक्त सुरेश ओला के अनुसार, इन सुधारों का मुख्य लक्ष्य कारोबारियों के लिए अनावश्यक प्रक्रियाओं को खत्म करना है। उन्होंने बताया, “हम भरोसे पर आधारित सिस्टम लागू कर रहे हैं। इससे न केवल उद्योग बिना देरी के शुरू हो सकेंगे, बल्कि राज्य में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।” सरकार का लक्ष्य है कि सभी प्रकार की व्यावसायिक मंजूरियों में लगने वाले समय को कम से कम 50 प्रतिशत तक घटाया जाए।

इन बदलावों से न केवल बड़े कॉर्पोरेट्स बल्कि छोटे स्टार्टअप्स और मध्यम वर्ग के व्यापारियों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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