Rajasthan High Court Crisis: 6 माह से खाली है मुख्य न्यायाधीश का पद, 11 जजों की कमी से लंबित मुकदमों का बढ़ा अंबार

राजस्थान की उच्च न्यायपालिका इस समय एक अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रही है। प्रदेश के सबसे बड़े न्यायालय, राजस्थान हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (सीजे) का पद खाली हुए इस सप्ताह पूरे 6 महीने बीत जाएंगे। विडंबना यह है कि वर्तमान में केंद्रीय विधि मंत्री राजस्थान से ही आते हैं, इसके बावजूद राज्य की उच्च न्यायपालिका पर न तो सुप्रीम कोर्ट की पर्याप्त निगाह है और न ही केंद्र सरकार की।

रिक्त पदों का गणित: न्याय की राह में बाधा

राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 50 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि इनमें से 11 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। जो पद भरे हुए हैं, उनमें भी दो न्यायाधीश राजस्थान से बाहर के राज्यों से आए हैं। केवल राजस्थान ही नहीं, यदि देश भर के उच्च न्यायालयों की स्थिति देखें तो कुल 1,122 पदों में से 316 पद रिक्त चल रहे हैं। राजस्थान हाईकोर्ट में सितंबर 2025 से सीजे का पद खाली है और आगामी समय में देश में 10 और मुख्य न्यायाधीशों के पद रिक्त होने वाले हैं।

मुकदमों का अंबार: 6.76 लाख मामले लंबित

न्यायाधीशों की इस भारी कमी का सीधा प्रहार आम आदमी के न्याय पर हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार:

  • देशभर में लंबित मुकदमे: 63.97 लाख से अधिक।
  • राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित मुकदमे: 6.76 लाख से अधिक। समय पर नियुक्तियां न होने के कारण केसों की पेंडेंसी लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे ‘न्याय में देरी, न्याय न मिलने के समान’ वाली स्थिति पैदा हो गई है।

कोलिजियम व्यवस्था पर गंभीर सवाल

झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रकाश टाटिया ने इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कोलिजियम द्वारा भेजे गए नामों का बार-बार खारिज होना या प्रक्रिया में अत्यधिक देरी होना चिंताजनक है। उनके अनुसार:

  1. अस्थायी नेतृत्व: बाहर से बहुत कम समय के लिए मुख्य न्यायाधीश बनाने से नीतिगत निर्णयों और नियुक्तियों में निरंतरता नहीं रह पाती।
  2. पुनः प्रक्रिया का औचित्य: नए सीजे के आने पर पुराने कोलिजियम के नामों को दोबारा विचार के लिए भेजना संस्थागत व्यवस्था के विपरीत है।
  3. प्रतिभा का नुकसान: नियुक्तियों में देरी के कारण वकालत क्षेत्र के योग्य उम्मीदवार न्यायपालिका से जुड़ने में कतराते हैं, जिसका असर भविष्य की न्याय व्यवस्था पर पड़ता है।

सरकार का रुख

प्रदेश के विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने इस मुद्दे पर कहा है कि राज्य सरकार इन रिक्तियों और संसाधनों की कमी को लेकर केंद्र के साथ निरंतर संपर्क में है। उन्होंने आश्वासन दिया कि न्यायिक पदों को भरने और लंबित प्रस्तावों को क्लियर करवाने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

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