अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के इतिहास में सबसे बड़े कलंक के रूप में देखे जाने वाले वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2022 पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी बाबूलाल कटारा अभी भी तकनीकी रूप से बर्खास्त नहीं हो पाए हैं। हालांकि उन्हें 18 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार किया गया था और जनवरी 2024 में निलंबित कर दिया गया था, लेकिन उनकी अंतिम विदाई का फैसला अभी भी राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम कोर्ट के बीच अटका हुआ है।
बर्खास्तगी में देरी की संवैधानिक वजह:
संविधान के अनुच्छेद 317 के अनुसार, लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को केवल राष्ट्रपति के आदेश से ही हटाया जा सकता है। इसके लिए राज्य सरकार को राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को रेफरेंस (प्रस्ताव) भेजना पड़ता है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट की जांच रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति अंतिम निर्णय लेते हैं। राज्य सरकार यह प्रस्ताव दो साल पहले ही भेज चुकी है, लेकिन विधिक प्रक्रियाओं के कारण इसमें समय लग रहा है।
भ्रष्टाचार का बड़ा नेटवर्क और संपत्ति:
एसीबी (ACB) की जांच में निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा के पास आय से 60 प्रतिशत अधिक संपत्ति पाई गई है। उनके पास से 51 लाख 20 हजार रुपए नकद और 500 ग्राम से अधिक सोने के आभूषण बरामद हुए हैं। इसके अतिरिक्त प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले की गहनता से जांच कर रहा है।
सरकारी आवास पर रची गई थी साजिश
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि बाबूलाल कटारा ने शिक्षक भर्ती का पेपर अपने सरकारी आवास पर ही लीक किया था। उनके भांजे विजय डामोर के जरिए इसे रजिस्टर में नोट कराया गया। जानकारी के अनुसार, इस पेपर को पहले 60 लाख रुपए में बेचा गया और बाद में भूपेंद्र सारण के साथ इसकी 80 लाख रुपए में डील हुई थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कटारा की अंतरिम जमानत याचिका भी रद्द कर दी है।
