जयपुर: राजस्थान में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत होने वाले गेहूं परिवहन (Transportation) के टेंडरों में बड़े गड़बड़झाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि करोड़ों रुपए के ये टेंडर चहेती फर्मों को देने के लिए पूरी प्रक्रिया में हेरफेर की गई।
करीब 80% फर्मों को तकनीकी मूल्यांकन (Technical Bid) में ही जानबूझकर बाहर कर दिया गया और बची हुई ‘सिंगल फर्मों’ को फाइनेंशियल बिड तक पहुंचाकर 129% तक ऊंची दरों पर टेंडर जारी कर दिए गए। अब तक 12 से ज्यादा जिलों में यह खेल सामने आ चुका है और 25 जिलों की शिकायतें सीधे मुख्य सचिव कार्यालय तक पहुंच गई हैं।
कैसे हुआ तकनीकी मूल्यांकन में खेल?
दस्तावेजों के अनुसार, कई जिलों में टेंडर प्रक्रिया में केवल दो फर्म ही शामिल हुईं। नियमों के अनुसार, संख्या कम होने पर टेंडर निरस्त हो जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके बजाय, तकनीकी बिड खोलकर चहेती फर्म को अकेले फाइनेंशियल बिड तक पहुंचाया गया और ठेका दे दिया गया।
RTPP एक्ट की आड़ में सरकार को करोड़ों का नुकसान
अफसरों ने आरटीपीपी एक्ट-2013 (RTPP Act-2013) के नियम 68 का हवाला देते हुए ‘कार्य की आवश्यकता’ का बहाना बनाया और कई गुना ऊंची दरों पर टेंडर स्वीकृत कर दिए। एक जिले (सिरोही) में तो सामान्य से 129 प्रतिशत अधिक दर पर टेंडर दिया गया है, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए के नुकसान की आशंका है।
40-50 रु. के मुकाबले 129% तक बढ़ी दरें
पिछले 15 वर्षों से प्रदेश में ‘चेक एंड बैलेंस’ सिस्टम के तहत परिवहन और वितरण की जिम्मेदारी अलग-अलग स्तर पर थी। हाल ही में इस व्यवस्था को बदल दिया गया है।
- अब गेहूं परिवहन के टेंडर खाद्य निगम के स्थान पर जिला रसद अधिकारी (DS0) स्तर पर जारी किए जा रहे हैं।
- पहले गेहूं परिवहन की दरें औसतन 40 से 50 रुपए प्रति क्विंटल तक रहती थीं।
- नई व्यवस्था के तहत जारी किए गए टेंडरों में ये दरें पुरानी दरों के मुकाबले 40 से लेकर 129% तक अधिक हैं।
इन जिलों में ऊंची दरों पर दिए गए टेंडर:
- सिरोही: 129%
- चूरू: 86%
- टोंक: 80%
- सीकर: 65%
- नागौर: 63%
मुख्यालय पर अपीलों का अंबार, व्यवस्था बेपटरी
जिलों में टेंडर प्रक्रिया से बाहर की गई फर्मों ने जयपुर मुख्यालय पर अपीलों की झड़ी लगा दी है। इस विवाद के चलते कई जिलों में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत गेहूं वितरण व्यवस्था भी प्रभावित होने की स्थिति में आ गई है।
मंत्री का क्या कहना है?
“गेहूं परिवहन के टेंडरों को सिंगल फर्म और ज्यादा दरों पर देने की शिकायत मुख्य सचिव कार्यालय में दर्ज होने की जानकारी मुझे नहीं है। हमने परिवहन टेंडरों में पारदर्शिता बनी रहे और नए ट्रांसपोर्टर आएं, इसके लिए कई नए प्रयोग किए हैं। गड़बड़ी सामने आने पर जयपुर समेत पांच जिलों में परिवहन का टेंडर लेने वाली फर्म को ब्लैक लिस्ट भी किया गया है।” > – सुमित गोदारा, खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री, राजस्थान
