स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षकों की नियुक्ति पर ‘यू-टर्न’: 9 माह पहले भ्रष्टाचार के आरोप में निरस्त हुआ आदेश वापस, 1 अप्रैल से फिर लगेंगे 2500 प्रशिक्षक

जयपुर: राजस्थान में सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक प्रशिक्षकों (Vocational Trainers) की नियुक्ति को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद (Rajasthan School Shiksha Parishad) के अधिकारियों ने अपने ही पुराने फैसले पर ‘यू-टर्न’ लेते हुए 9 महीने पहले भ्रष्टाचार के आरोपों में निरस्त किए गए अनुबंधों को फिर से बहाल कर दिया है। परिषद के इस नए आदेश के बाद अब आगामी 1 अप्रैल से स्कूलों में करीब 2500 व्यावसायिक प्रशिक्षकों की फिर से नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच लिया गया फैसला

गौरतलब है कि पिछले साल जून में व्यावसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि प्लेसमेंट एजेंसियां प्रशिक्षकों की नियुक्ति के बदले मोटी रकम की मांग कर रही हैं। मामला शिक्षा मंत्री मदन दिलावर तक पहुँचा था, जिन्होंने प्लेसमेंट एजेंसियों में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर सख्त रुख अपनाया था।

13 जून 2025 को निरस्त हुआ था अनुबंध

शिक्षा मंत्री के निर्देशों पर संज्ञान लेते हुए परिषद ने 13 जून 2025 को 10 प्रमुख फर्मों के साथ किए गए अनुबंधों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया था। लेकिन अब 9 महीने बीतने के बाद, परिषद ने उस निरस्त आदेश को वापस ले लिया है। हैरानी की बात यह है कि जिन फर्मों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें थीं, उन्हें ही फिर से प्रशिक्षक लगाने की छूट दे दी गई है।

ऑडियो क्लिप ने मचाया था हड़कंप

इस पूरे मामले में पिछले साल जून में एक ऑडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। इस ऑडियो में एक दलाल प्रशिक्षक लगाने के नाम पर एक से डेढ़ लाख रुपये की मांग करता सुना गया था। दलाल यहाँ तक कह रहा था कि “लोग तो पेपर वाली परीक्षा के लिए 10-10 लाख रुपये फेंक देते हैं, यहाँ तो सीधा काम मिल रहा है।” हालांकि, उस समय परिषद के अधिकारियों ने इस ऑडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी।

1 अप्रैल से शुरू होगी प्रक्रिया

परिषद द्वारा बुधवार को जारी नए आदेश में सभी 10 फर्मों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आवंटित स्कूलों में निर्धारित योग्यताधारी प्रशिक्षकों को 1 अप्रैल से फिर से नियोजित करना सुनिश्चित करें। इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिर भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी कंपनियों पर इतनी मेहरबानी क्यों दिखाई जा रही है।

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