जयपुर। राजधानी जयपुर के नगर निगम में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक और उदाहरण मंगलवार को सामने आया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर निगम (हैरिटेज और ग्रेटर) की पशु प्रबंधन शाखा में चल रहे रिश्वतखोरी के खेल का पर्दाफाश किया है। एसीबी की टीम ने एक कंप्यूटर ऑपरेटर को 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इसके तुरंत बाद दो जिम्मेदार पशु चिकित्सा अधिकारियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया, जिनके लिए यह रिश्वत ली जा रही थी।
कुत्तों के अंगों की गिनती के नाम पर वसूली
एसीबी महानिदेशक पुलिस गोविन्द गुप्ता ने बताया कि परिवादी को जयपुर शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का टेंडर मिला था। परिवादी ने काम पूरा कर बिल पेश किए थे। आरोप है कि बिलों को आगे बढ़ाने और कुत्तों के निकाले गए अंगों (Uterus और Testicles) की गिनती और सत्यापन करने के बदले में अधिकारियों ने भारी भरकम रिश्वत की मांग की।
15 लाख की डिमांड, 4 लाख लेते दबोचा
परिवादी की शिकायत पर एसीबी ने सत्यापन करवाया, जिसमें कुल 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई।
- डॉ. योगेश शर्मा (पशु चिकित्सा अधिकारी-II, हैरिटेज): इन्होंने बकाया बिलों को पास करने के लिए 12 लाख रुपये मांगे।
- डॉ. राकेश कलोरिया (पशु चिकित्सा अधिकारी-I, ग्रेटर): इन्होंने नवंबर-दिसंबर के बिलों के लिए 4 लाख रुपये मांगे। साथ ही 1 जनवरी 2026 से हर महीने 3.50 लाख रुपये की ‘बंधी’ (मासिक रिश्वत) देने का दबाव भी बनाया।
ऐसे बुना गया जाल
यह पूरी वसूली कंप्यूटर ऑपरेटर (संविदा कर्मी) जितेन्द्र सिंह के जरिए की जा रही थी। एसीबी ने जाल बिछाया और सोमवार को जैसे ही जितेन्द्र सिंह ने परिवादी से 4 लाख रुपये लिए, टीम ने उसे धर दबोचा। इसके बाद एसीबी ने डॉ. योगेश शर्मा और डॉ. राकेश कलोरिया को भी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया।
निगम में मचा हड़कंप
एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और आईजी सत्येन्द्र कुमार के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई से नगर निगम के दोनों जोनों में हड़कंप मच गया है। पशु प्रबंधन शाखा की कार्यप्रणाली अब जांच के दायरे में है। एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
