राजस्थान और मध्यप्रदेश को सीधे रेल संपर्क से जोड़ने वाली रामगंज मंडी–भोपाल नई रेल लाइन परियोजना अब पूर्णता की ओर है। 276 किमी लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लगभग 187 किमी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। कोटा मंडल के अधीन आने वाले 165 किमी खंड में से 145 किमी पर पटरियां बिछाई जा चुकी हैं, जबकि शेष 20 किमी का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
समय और दूरी की बड़ी बचत
वर्तमान में भोपाल से कोटा जाने के लिए यात्रियों को नागदा-उज्जैन या बीना होकर लंबा चक्कर काटना पड़ता है। नई रेल लाइन शुरू होने से यह दूरी लगभग 100 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे यात्रा के समय में 2 से 3 घंटे की बचत होगी। विशेष रूप से जयपुर से दक्षिण भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों का मार्ग 115 किमी तक छोटा हो जाएगा।
आर्थिक और औद्योगिक लाभ
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ झालावाड़ स्थित कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट को मिलेगा। कोयला परिवहन का मार्ग 42 किमी छोटा होने से माल ढुलाई की लागत में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही राजस्थान के कोटा और झालावाड़ जिले, मध्यप्रदेश के राजगढ़, सीहोर और भोपाल जिले सीधे जुड़ जाएंगे।
स्टेशन और बुनियादी ढांचा
परियोजना के तहत कुल 27 स्टेशन बनाए गए हैं, जो लाखों ग्रामीण और शहरी आबादी को जोड़ेंगे। दुर्गम पहाड़ियों के बीच से निकलने वाली इस लाइन में 4 सुरंगें, 4 बड़े पुल और 171 अंडरपास का निर्माण किया गया है। कोटा मंडल ने चालू वित्तीय वर्ष (2026) तक अपना लक्ष्य पूरा करने की योजना बनाई है, जबकि भोपाल मंडल के शेष खंडों को 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
Fact File: परियोजना एक नज़र में
| विवरण | आंकड़े / जानकारी |
| कुल लंबाई | 276 किलोमीटर |
| अनुमानित लागत | ₹3,035 करोड़ |
| कुल स्टेशन | 27 (रामगंज मंडी से निशातपुरा तक) |
| कनेक्टिविटी | 5 जिले (कोटा, झालावाड़, राजगढ़, सीहोर, भोपाल) |
| बचत | 100 किमी दूरी और ~3 घंटे का समय |
| इन्फ्रास्ट्रक्चर | 4 सुरंग, 171 अंडरपास, 34 मुख्य पुल |
प्रमुख 27 स्टेशनों की सूची:
रामगंज मंडी, जुल्मी, झालावाड़, झालरापाटन, जूनाखेड़ा, अमेठा, अकलेरा, पचोला, घटोली, नयागांव, भोजपुर, देवपुरा, खिलचीपुर, राजगढ़, नरसिंहपुर, ब्यावरा, पीपलखेड़ा, सोनकच्छ, नरसिंहगढ़, जमुनियागंज, कुरावर, श्यामपुर, दुराहा, जरखेड़ा, मुगलियाहाट, संत हिरदाराम नगर और निशातपुरा।