राजस्थान में सामाजिक सुधारों और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। भजनलाल कैबिनेट ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को अपनी हरी झंडी दे दी है। इस नए कानून के लागू होने के बाद प्रदेश में अब कोई भी व्यक्ति एक से ज्यादा शादी (बहुविवाह) नहीं कर सकेगा और ऐसा करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा, हालांकि पुनर्विवाह करने की पूरी छूट रहेगी। इसके साथ ही, राज्य के आदिवासी और जनजातीय समुदाय की विशिष्ट परंपराओं व रीति-रिवाजों का सम्मान करते हुए उन्हें इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए यूसीसी बिल के तहत प्रदेश में विवाह और तलाक का 60 दिन के भीतर सरकारी रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को भी इसकी शुरुआत और समाप्ति की जानकारी प्रशासन को देनी होगी। तय सीमा में रजिस्ट्रेशन न कराने पर 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। नए कानून में उत्तराधिकार के नियमों को भी आसान और लिंग-समान बनाया गया है, जिसके तहत अब सभी धर्मों में बेटे और बेटियों को संपत्ति में बराबर का हक मिलेगा। साथ ही, पिता से पहले बेटे की मृत्यु हो जाने की स्थिति में पोते को भी संपत्ति में पूरा अधिकार दिया जाएगा।
कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य ‘एक प्रदेश-एक कानून’ की भावना को साकार करना है, ताकि सभी नागरिकों को समान अधिकार मिल सकें। इस महत्वपूर्ण विधेयक को 20 अगस्त से शुरू हो रहे राजस्थान विधानसभा के आगामी सत्र में पटल पर रखा जाएगा। राज्य सरकार का यह फैसला प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने, सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने और कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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