जयपुर: राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सोमवार को मनरेगा (MGNREGA) मजदूरों के भुगतान और कार्यों की स्वीकृति का मुद्दा गरमाया रहा। जालोर जिले में मनरेगा श्रमिकों को समय पर मजदूरी न मिलने के सवाल पर ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने सदन में जवाब पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भुगतान में हो रही देरी के पीछे मुख्य कारण केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि में विलंब है।
जालोर विधायक ने उठाया भुगतान का मुद्दा
प्रश्नकाल के दौरान जालोर से विधायक समरजीत सिंह ने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जिले में मनरेगा के तहत काम तो स्वीकृत हो रहे हैं, लेकिन मजदूरों को उनकी मेहनत का पैसा समय पर नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश कार्यों की स्वीकृति जयपुर (राज्य स्तर) से दी जा रही है, जिससे प्रक्रिया जटिल हो रही है और देरी हो रही है।
जिला स्तर पर ही होती है कार्यों की स्वीकृति: मंत्री
विधायक के आरोपों का जवाब देते हुए मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने स्पष्ट किया कि मनरेगा कार्यों की फाइलें राज्य स्तर पर नहीं मंगाई जाती हैं। उन्होंने कहा, “कार्यों की स्वीकृति के लिए विकेंद्रीकृत व्यवस्था लागू है और यह अधिकार जिला स्तर पर ही सुरक्षित है।”
केंद्र को लिखा गया है पत्र, दस्तावेज भी हैं वजह
बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि लंबित भुगतान के मामले में सरकार क्या ठोस कदम उठा रही है। इस पर किरोड़ी लाल मीणा ने जवाब दिया:
- केंद्र सरकार की राशि: भुगतान में देरी इसलिए हो रही है क्योंकि केंद्र के हिस्से की राशि समय पर प्राप्त नहीं हुई है। इसके लिए भारत सरकार को औपचारिक पत्र लिखा जा चुका है।
- दस्तावेजों की कमी: मंत्री ने यह भी बताया कि कई मामलों में मजदूरों की तरफ से केवाईसी या अन्य दस्तावेजों की पूर्ति समय पर नहीं हो पाती, जिससे तकनीकी रूप से भुगतान अटक जाता है।
उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि जैसे ही केंद्र से बजट प्राप्त होगा, सभी लंबित भुगतान प्राथमिकता के आधार पर कर दिए जाएंगे।
