जयपुर: पिछले 11 वर्षों से राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को हुनरमंद बनाकर उनके भविष्य को संवारने वाले 5155 व्यावसायिक प्रशिक्षक (Vocational Trainers) आज खुद अपने भविष्य को लेकर अंधकार में हैं। प्लेसमेंट एजेंसियों (VTP – Vocational Training Providers) के हाथों मानसिक और शारीरिक शोषण का शिकार हो रहे इन प्रशिक्षकों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
इसी शोषणकारी व्यवस्था से मुक्ति और जॉब सुरक्षा की मांग को लेकर ‘वोकेशनल ट्रेनर वेलफेयर एसोसिएशन, राजस्थान’ ने पिंक सिटी प्रेस क्लब, जयपुर में एक अहम प्रेस वार्ता का आयोजन किया और राज्य सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखीं।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से न्याय की गुहार
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का ध्यान इस ज्वलंत मुद्दे की ओर आकर्षित करते हुए स्पष्ट कहा है कि जब अन्य राज्य इन प्रशिक्षकों को न्याय दे सकते हैं, तो राजस्थान सरकार मौन क्यों है?

प्रशिक्षकों की 3 प्रमुख मांगें:
- एजेंसियों (VTP) से तत्काल मुक्ति: सेवा प्रदाता एजेंसियों/कंपनियों की बिचौलिया और शोषणकारी व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से समाप्त किया जाए।
- सीधा समायोजन (हरियाणा मॉडल): ‘हरियाणा मॉडल’ और हिमाचल प्रदेश जैसे अन्य राज्यों की तर्ज पर इन प्लेसमेंट एजेंसियों को हटाकर सभी 5155 व्यावसायिक प्रशिक्षकों को सीधे शिक्षा विभाग (Education Department) में समायोजित (Adjust) किया जाए।
- जॉब सुरक्षा और वेतन: असम और छत्तीसगढ़ राज्यों की तर्ज पर इन प्रशिक्षकों की जॉब सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उचित वेतन वृद्धि लागू की जाए।
केंद्र की गाइडलाइन का हवाला, राज्य सरकार से सवाल
ट्रेनर्स ने सवाल उठाया है कि जब केंद्र सरकार (MHRD) की स्पष्ट गाइडलाइन मौजूद है और हरियाणा, हिमाचल, असम व जम्मू-कश्मीर जैसे कई राज्य इन प्रशिक्षकों को एजेंसियों के चंगुल से निकालकर सीधे शिक्षा विभाग से जोड़ चुके हैं, तो फिर राजस्थान में यह ठेका प्रथा और शोषण क्यों जारी है? प्रशिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ‘हरियाणा मॉडल’ लागू कर उन्हें न्याय नहीं दिया गया, तो प्रदेश भर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।