जयपुर में ‘हम भारत के लोग’ के संदेश के साथ निकली लोकमंथन यात्रा, महारानी कॉलेज में बिखरे लोक संस्कृति के रंग

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जयपुर। राष्ट्रीय विचार कुंभ ‘लोकमंथन–2026’ के तहत आज जयपुर महानगर में ‘हम भारत के लोग’ के संदेश के साथ ‘लोकमंथन यात्रा’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस यात्रा की शुरुआत श्री गोविंद देव जी मंदिर में दर्शन के बाद जलेबी चौक से की गई। लोकमंथन–2026 आयोजन समिति की अध्यक्ष एवं राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने यात्रा रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में युवाओं, प्रबुद्धजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

लोक वाद्य, अखाड़े और खेल गतिविधियों ने बांधा समां

यह यात्रा केवल एक पैदल मार्च नहीं थी, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत का एक जीवंत प्रदर्शन थी। यात्रा में शाही लवाजमा, लोक वाद्य, पारंपरिक परिधानों में सजे लोग और अखाड़ों के खिलाड़ी प्रमुख आकर्षण रहे। क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने यात्रा के दौरान ही साइकिलिंग, स्केटिंग, फुटबॉल, कबड्डी और सतोलिया जैसे खेलों का प्रदर्शन कर लोकमंथन के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया। हवामहल, बड़ी चौपड़ और अल्बर्ट हॉल होते हुए गुजरी इस यात्रा के मार्ग में जगह-जगह रंगोलियां सजाई गईं और व्यापार मंडलों द्वारा पुष्पवर्षा कर इसका भव्य स्वागत किया गया। इस पूरी यात्रा में करीब 1500 खिलाड़ी और नागरिक शामिल हुए।

महारानी कॉलेज में दिखा लोक कलाओं का अद्भुत संगम

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यात्रा का समापन ऐतिहासिक महारानी कॉलेज परिसर में हुआ, जहाँ यह आयोजन एक विशाल सांस्कृतिक महोत्सव में बदल गया। महारानी कॉलेज में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में लगभग 5,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें 3,500 से अधिक युवा महाविद्यालयीन विद्यार्थी (खासकर छात्राएं) शामिल थीं।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और लोक आस्था की झांकियां

महारानी कॉलेज के मुख्य सभागार में ‘धरती धोरा री’ नृत्य, चरी नृत्य, मांड गायन, भवई, कच्छी घोड़ी, कालबेलिया, कठपुतली नृत्य और मलखम्ब जैसे पारंपरिक नृत्यों व खेलों का शानदार प्रदर्शन किया गया। ‘स्वतंत्रता समर में राजस्थान के लोक नायक’ विषय पर एक मनमोहक नृत्य नाटिका भी प्रस्तुत की गई। राजस्थान की लोक आस्था को दर्शाने के लिए बाबा रामदेव जी और वीर तेजाजी की सजीव झांकियां सजाई गईं, जिन्होंने सभी का मन मोह लिया।

‘लोक में भारत’ और संविधान पर हुआ वैचारिक विमर्श

लोकमंथन के वैचारिक पक्ष को मजबूत करते हुए कॉलेज के सेमिनार हॉल और खुले मंचों पर विभिन्न विषयों पर गंभीर चर्चाएं और गोष्ठियां आयोजित की गईं।

  • ‘हम भारत के लोग—हमारी भाषा हमारी पहचान’ और ‘हम भारत के लोग: संविधान और लोक संस्कृति का समन्वय’ जैसे विषयों पर परिचर्चाएं हुईं।
  • ‘लोक में भारत’ और ‘लोक साहित्य और संस्कृति’ पर व्याख्यान दिए गए।
  • इतिहास लेखन की लोक परंपरा और वंशावली वाचन के माध्यम से राजस्थान के मौखिक इतिहास को भी मंच पर प्रस्तुत किया गया।

प्रदर्शनियां, पारंपरिक खेल और लोक व्यंजन रहे आकर्षण

महारानी कॉलेज के प्रदर्शनी क्षेत्र में संत रविदास, राजस्थान की वीर-वीरांगनाओं, भारतीय संविधान, गुरुकुल परंपरा, और औषधीय पौधों के महत्व को दर्शाने वाली शानदार प्रदर्शनियां लगाई गईं। युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए कबड्डी, रस्साकशी, तीरंदाजी और साफा बांधने जैसी पारंपरिक खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। वहीं, लोक व्यंजन क्षेत्र में राजस्थान के पारंपरिक स्वाद (व्यंजनों) की महक भी बिखरी रही।

इस पूरी ‘लोकमंथन यात्रा’ और महारानी कॉलेज के आयोजनों ने लोक कला, इतिहास, खेल, पर्यावरण और संविधान को एक मंच पर लाते हुए सही मायनों में ‘हम भारत के लोग’ की भावना को चरितार्थ किया।

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