जयपुर: अपराधियों की धरपकड़ के बाद सोशल मीडिया पर उनकी फोटो डालकर वाहवाही लूटने के चलन पर राजस्थान पुलिस ने पूर्ण विराम लगा दिया है। पुलिस मुख्यालय ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए गिरफ्तार आरोपियों (Accused) की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया, मीडिया या प्रेस के साथ साझा करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध) डॉ. हवा सिंह घुमरिया ने प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर और एसपी को इस संबंध में सख्त निर्देश (SOP) जारी किए हैं। यह कवायद राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा 20 जनवरी 2026 को दिए गए निर्णय की पालना में की गई है।
‘आरोपी दोषी नहीं, गरिमा उसका हक’
जारी आदेश में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को गरिमा, सम्मान और निजता (Privacy) के साथ जीने का अधिकार है। पुलिस के अनुसार, “गिरफ्तार व्यक्ति केवल ‘आरोपित’ होता है, ‘दोषी’ नहीं।” सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की मंशा के अनुरूप, गिरफ्तारी के बाद भी किसी इंसान की मानवीय गरिमा खत्म नहीं होती। इसलिए उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करना कानूनन गलत है।
इन गतिविधियों पर लगा ‘फुल स्टॉप’
नई गाइडलाइन के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए निम्नलिखित कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे:
- सोशल मीडिया बैन: गिरफ्तारी के वक्त या बाद में आरोपी का फोटो/वीडियो किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स आदि) पर अपलोड नहीं किया जाएगा।
- मीडिया शेयरिंग: पुलिस के आधिकारिक या अनौपचारिक वॉट्सऐप ग्रुप्स या प्रेस ब्रीफिंग में आरोपियों की तस्वीरें साझा नहीं की जाएंगी।
- सार्वजनिक परेड: आरोपी को अपराधी की तरह प्रदर्शित (Parade) नहीं किया जाएगा और न ही सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाएगा।
मीडिया ट्रायल रोकने की पहल
गाइडलाइन में मीडिया ट्रायल को हतोत्साहित करने के भी निर्देश हैं। अब पुलिस ब्रीफिंग के दौरान आरोपी को अपमानजनक हालात में मीडिया के सामने पेश नहीं किया जा सकेगा। अधिकारियों को ब्रीफिंग के दौरान शब्दों का चयन भी बेहद सावधानी और गरिमा के साथ करना होगा, ताकि जांच प्रभावित न हो और किसी के अधिकारों का हनन न हो।
थाने में व्यवहार: बुजुर्गों और महिलाओं के लिए संवेदनशीलता
हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार को लेकर भी मानक तय किए गए हैं। थाने में आरोपी को बैठाने और रखने की व्यवस्था सुरक्षित और सभ्य होनी चाहिए। विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, युवतियों और कमजोर वर्ग के लोगों के साथ पुलिस को “विशेष संवेदनशीलता” बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
