नई दिल्ली। देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए 1 फरवरी 2026 का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। संसद में अपना बजट भाषण देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय टैक्स सिस्टम के इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की है कि सरकार 1961 के पुराने और जटिल आयकर अधिनियम (Income Tax Act, 1961) को खत्म कर उसकी जगह एक बिल्कुल ‘नया इनकम टैक्स एक्ट’ (New Income Tax Act) ला रही है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा।
इस घोषणा के साथ ही देश में पिछले साढ़े छह दशकों से चले आ रहे उस कानून की विदाई तय हो गई है, जिसकी जटिलताओं से आम करदाता अक्सर परेशान रहते थे।
क्यों पड़ी नए कानून की जरूरत?
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि पुराने कानून में इतनी बार संशोधन हो चुके हैं कि वह बेहद जटिल हो गया है।
- उद्देश्य: नए कानून का एकमात्र उद्देश्य टैक्स प्रक्रिया को सरल (Simplify), स्पष्ट और पारदर्शी बनाना है।
- मुकदमेबाजी घटेगी: पुराने एक्ट की वजह से अदालतों में लाखों टैक्स केस पेंडिंग हैं। नया एक्ट ऐसी अस्पष्टताओं को खत्म करेगा जिससे लिटिगेशन (मुकदमेबाजी) कम हो।
- भाषा होगी आसान: नए कानून की भाषा इतनी सरल होगी कि एक सामान्य पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी बिना चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की मदद के अपना टैक्स समझ सकेगा।
1 अप्रैल से क्या बदलेगा?
निर्मला सीतारमण ने बताया कि यह महज एक संशोधन नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का कायाकल्प है।
- पुरानी धाराएं खत्म: नए एक्ट में धाराओं (Sections) और उप-धाराओं की संख्या को काफी कम कर दिया जाएगा।
- 6 महीने में पूरा ड्राफ्ट: सरकार ने पिछले 6 महीनों में इस नए कानून का व्यापक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसे संसद के इसी सत्र में चर्चा के बाद मंजूरी दी जाएगी।
- टैक्स आतंक से मुक्ति: नए प्रावधानों में टैक्स अधिकारियों (Tax Officers) की मनमानी शक्तियों पर लगाम लगाई जाएगी और फेसलेस असेसमेंट को और मजबूत किया जाएगा।
मिडिल क्लास को मिलेगी बड़ी राहत
हालांकि वित्त मंत्री ने नए एक्ट के तहत स्लैब का विस्तृत ब्यौरा अलग से जारी करने की बात कही, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि नया एक्ट मिडिल क्लास (मध्यम वर्ग) के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। जानकारों का मानना है कि नए एक्ट में निवेश (Investment) पर मिलने वाली छूट और डिडक्शन की प्रक्रिया को बेहद आसान बनाया जाएगा। इसमें पुरानी टैक्स रिजीम और नई टैक्स रिजीम के कन्फ्यूजन को खत्म कर एक ही ‘सशक्त और कम दरों वाली’ व्यवस्था लागू की जा सकती है।
विपक्ष और विशेषज्ञों की राय
इस ऐलान का उद्योग जगत ने स्वागत किया है। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि 1961 का कानून ‘लाइसेंस राज’ के दौर का था, जबकि 2026 के डिजिटल भारत को एक आधुनिक कानून की जरूरत थी। वहीं, विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि नए कानून को लागू करने से पहले उस पर संसदीय समिति में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए ताकि जल्दबाजी में कोई गड़बड़ी न हो।
