रक्षा बजट 2026: चीन-पाक को कड़ा संदेश, सेना को मिला अब तक का सबसे बड़ा 6.9 लाख करोड़ का ‘रक्षा कवच’, आधुनिकीकरण पर पूरा जोर

नई दिल्ली। पड़ोसी मुल्कों से मिल रही चुनौतियों और वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच मोदी सरकार ने देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को संसद में पेश किए गए बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र के लिए खजाना खोलते हुए इसे 6.9 लाख करोड़ रुपये (अनुमानित) के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा दिया है।

यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले करीब 12 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में स्पष्ट संदेश दिया कि सशक्त भारत की नींव सुरक्षित सीमाओं पर टिकी है। सरकार का लक्ष्य सेना को न केवल आधुनिक बनाना है, बल्कि उसे तकनीक और मारक क्षमता के मामले में दुनिया की शीर्ष सेनाओं के बराबर खड़ा करना है।

आधुनिक हथियारों पर जोर: फाइटर जेट और मिसाइलों के लिए बड़ा फंड

इस बार के रक्षा बजट की सबसे अहम बात सेना के आधुनिकीकरण (Modernization) पर विशेष जोर देना है। सरकार ने ‘पूंजीगत व्यय’ (Capital Expenditure) में भारी इजाफा किया है। इस फंड का इस्तेमाल सेना के लिए नए फाइटर जेट, अत्याधुनिक पनडुब्बियां, युद्धपोत और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों की खरीद में किया जाएगा। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि सेना के पास हथियारों की कोई कमी न रहे और पुरानी हो चुकी प्रणालियों को तेजी से बदला जा सके।

आत्मनिर्भर भारत: 75% खरीद अब स्वदेशी कंपनियों से होगी

सरकार ने रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को और मजबूत किया है। बजट में यह प्रावधान किया गया है कि रक्षा खरीद का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अब घरेलू उद्योगों (Domestic Industry) के लिए आरक्षित रहेगा। इससे न केवल विदेशी हथियारों पर भारत की निर्भरता कम होगी, बल्कि देश की सरकारी (PSUs) और निजी डिफेंस कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने का बड़ा अवसर मिलेगा। यह कदम रक्षा विनिर्माण में भारत को वैश्विक हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

चीन सीमा पर तैयारी: बीआरओ का बजट 20% बढ़ा, बनेंगी ऑल-वेदर टनल

चीन से लगती सीमाओं (LAC) पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करना इस बजट का एक प्रमुख केंद्र बिंदु रहा है। लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे दुर्गम और संवेदनशील इलाकों में रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) के बजट में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

इस अतिरिक्त राशि का उपयोग पहाड़ियों में हर मौसम में खुली रहने वाली सुरंगों (All-weather tunnels) और सड़कों का जाल बिछाने में किया जाएगा। इससे सेना की रसद और जवानों की आवाजाही को बेहद सुगम और तेज बनाया जा सकेगा, जो युद्ध की स्थिति में निर्णायक साबित होता है।

भविष्य के युद्ध: ‘डीप टेक’ और साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान

भविष्य के युद्धों की बदलती प्रकृति को देखते हुए सरकार ने पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर सोचने का फैसला किया है। बजट में ‘डीप टेक’ (Deep Tech) और इनोवेशन पर भारी निवेश करने की घोषणा की गई है। सरकार ने रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप्स और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए बड़े फंड का ऐलान किया है, जिसका मकसद साइबर वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्पेस डिफेंस जैसी तकनीकों में भारत को महारत दिलाना है।

जवानों का ख्याल: वेतन-भत्तों और ओआरओपी के लिए पर्याप्त राशि

बजट में देश की रक्षा करने वाले जवानों और पूर्व सैनिकों का भी पूरा ख्याल रखा गया है। राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) के तहत सैनिकों के वेतन, भत्ते और पूर्व सैनिकों की पेंशन (OROP) के लिए पर्याप्त राशि आवंटित की गई है। इसके साथ ही अग्निवीरों के लिए स्किल डेवलपमेंट और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी बजट में विशेष प्रावधानों के संकेत दिए गए हैं, ताकि सेवा के बाद भी उन्हें बेहतर अवसर मिल सकें।

रणनीतिक संदेश: संप्रभुता से कोई समझौता नहीं

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों को एक कड़ा कूटनीतिक और रणनीतिक संदेश है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। बॉर्डर कनेक्टिविटी से लेकर आधुनिक तकनीक तक, हर मोर्चे पर भारत अपनी क्षमताओं को लगातार अपग्रेड कर रहा है।

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