चंबल में अवैध रेत खनन और जोजरी नदी प्रदूषण पर एक्शन: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से की अहम चर्चा

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जयपुर/नई दिल्ली। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। इसी क्रम में राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन की रोकथाम और जोजरी नदी तंत्र में औद्योगिक प्रदूषण की समस्या के स्थायी समाधान पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

चंबल में अवैध खनन पर कड़ी निगरानी: 200 होमगार्ड और 65 सीसीटीवी तैनात

मुख्य सचिव ने केंद्रीय मंत्री को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अनुपालना में उठाए गए कड़े कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चंबल अभयारण्य के 40 संवेदनशील स्थानों पर 200 बॉर्डर होमगार्ड तैनात किए गए हैं, साथ ही चौबीसों घंटे निगरानी के लिए 65 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं। कड़े प्रवर्तन अभियान के तहत जनवरी 2025 से जून 2026 की अवधि के दौरान अवैध रेत खनन और परिवहन के मामलों में 536 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गईं और 541 वाहन जब्त किए गए हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय समिति द्वारा संबंधित विभागों की कार्रवाई की नियमित समीक्षा भी की जा रही है।

जोधपुर में 306 वस्त्र इकाइयां बंद, ZLD तकनीक पर हो रहा काम

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बैठक के दौरान जोजरी, लूणी और बांडी नदी प्रणाली में औद्योगिक प्रदूषण की रोकथाम पर भी विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप जोधपुर में साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (CETP) और उससे जुड़ी 306 वस्त्र उद्योग इकाइयों का संचालन पूरी तरह बंद है। संयंत्र को ‘शून्य तरल उत्सर्जन’ (ZLD – Zero Liquid Discharge) प्रणाली के अनुरूप उन्नत करने की योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

प्रदूषण के स्थायी समाधान के लिए संशोधित कार्ययोजना प्रस्तुत

मुख्य सचिव ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि जोजरी, बांडी एवं लूणी नदी तंत्र में प्रदूषण के स्थायी समाधान के लिए राज्य सरकार ने व्यापक कार्ययोजना का संशोधित मसौदा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति को सौंप दिया है। बैठक में दोनों प्रमुख नदी प्रणालियों के संरक्षण और शीर्ष अदालत के निर्देशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय पर सहमति बनी।

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