जैसलमेर। सीमावर्ती जिले जैसलमेर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी फंडिंग और शिक्षा की आड़ में चल रहे अवैध धर्मांतरण के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। ईडी के जयपुर जोनल कार्यालय ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के प्रावधानों के तहत जैसलमेर में 19 सितंबर को दो ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) चलाया। जांच में बेल्जियम की एक संस्था से बिना एफसीआरए (FCRA) पंजीकरण के करीब 5.10 करोड़ रुपये का अवैध विदेशी चंदा प्राप्त करने और उसका इस्तेमाल धर्मांतरण व धार्मिक गतिविधियों में करने की पुष्टि हुई है।
देउ राम और ज्ञान चंद के खातों में आई 5.10 करोड़ की रकम
ईडी को खुफिया इनपुट मिला था कि जैसलमेर निवासी देउ राम बेल्जियम स्थित एक संस्था से अवैध रूप से विदेशी फंड प्राप्त कर रहा है। इस पैसे का उपयोग समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों के लोगों को प्रभावित कर उनका धर्मांतरण कराने के लिए किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि देउ राम और उसके सहयोगी ज्ञान चंद को कुल 5.10 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग मिली। इस भारी-भरकम राशि को छिपाने के लिए बैंकों को झूठी जानकारी दी गई और इसे पारिवारिक भरण-पोषण, बचत, शैक्षणिक सेवाएं, सांस्कृतिक गतिविधियां और कमीशन एजेंट सेवाओं के नाम पर मंगाया गया।
ब्रसेल्स की ‘अमर एएसबीएल’ संस्था से आ रहा था पैसा
जांच एजेंसी के अनुसार, अधिकांश विदेशी फंड बेल्जियम के ब्रसेल्स स्थित ‘अमर एएसबीएल’ (Amar ASBL) नामक गैर-लाभकारी संगठन से भेजा जा रहा था। इस संस्था की स्थापना 2011 में हुई थी और इसका संचालन बेल्जियम के दो नागरिक— जोस गोफिनेट (Jose Goffinet) और उसका बेटा सालियन गोफिनेट (Salian Goffinet) कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह विदेशी संस्था विशेष रूप से केवल जैसलमेर में ही काम कर रही है, लेकिन इसने भारत में किसी भी ट्रस्ट या एनजीओ के रूप में कोई पंजीकरण नहीं कराया है। यह संस्था पिछले 14-15 वर्षों से देउ राम और ज्ञान चंद के जरिए चोरी-छिपे अपनी गतिविधियां संचालित कर रही थी।
शिक्षा के नाम पर धार्मिक सभाएं और ब्रेनवॉश
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि देउ राम ने इस विदेशी चंदे में से करीब 2.60 करोड़ रुपये नकद (कैश) निकाले, जिसका कोई हिसाब-किताब या वित्तीय रिकॉर्ड नहीं रखा गया। बेल्जियम की इस संस्था के प्रभाव में गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के बहाने उनके और उनके परिजनों के धार्मिक व सांस्कृतिक विश्वासों को बदलने का प्रयास किया जा रहा था। जोस गोफिनेट और सालियन गोफिनेट हर साल 2 से 3 सप्ताह के लिए जैसलमेर आते थे, जहाँ वे बच्चों के माता-पिता और रिश्तेदारों से मिलकर धार्मिक सभाएं आयोजित करते थे और अपनी धार्मिक मान्यताओं का प्रचार-प्रसार करते थे।
बैंकों ने रोका पैसा तो दूसरे खातों का लिया सहारा
ईडी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि हाल ही में जब बैंकों ने संदिग्ध लेन-देन को देखते हुए देउ राम और ज्ञान चंद के खातों में विदेशी रकम जमा करने पर रोक लगा दी, तो इस नेटवर्क ने दूसरा रास्ता खोज लिया। इसके बाद बेल्जियम से आने वाले पैसों को जैसलमेर के अन्य संबंधित व्यक्तियों के व्यक्तिगत बैंक खातों में रूट करने का प्रयास किया गया। छापेमारी के दौरान ईडी को कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर मामले में आगे की जांच की जा रही है।
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