राजस्थान कैबिनेट के बड़े फैसले: UCC और ट्री प्रोटेक्शन बिल को मंजूरी, कर्मचारियों व शहीदों के परिजनों के लिए अहम घोषणाएं

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को राज्य मंत्रिमंडल की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पर्यावरण संरक्षण, समान नागरिक संहिता (UCC), ग्रामीण जलापूर्ति, कार्मिक कल्याण, सैनिक कल्याण और भूमि आवंटन से जुड़े कई ऐतिहासिक व दूरगामी फैसले लिए गए।

कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल और उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के.के. विश्नोई ने इन निर्णयों की विस्तृत जानकारी मीडिया को दी

‘द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल-2026’ का अनुमोदन

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप, राज्य मंत्रिमंडल ने ‘द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) विधेयक-2026’ के प्रारूप को अपनी मंजूरी दे दी है। इसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।

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  • इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों को एक समान, पारदर्शी और व्यवस्थित रूप देना है।
  • यह प्रारूप उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है।
  • इस कानून से अनुसूचित जनजातियों (ST) और संविधान के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले वर्गों को पूरी तरह बाहर रखा गया है।
  • नियमों के तहत विवाह पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और बहुविवाह पर रोक लगाई गई है, हालांकि सभी धर्मों और समुदायों को अपनी परंपराओं (जैसे- सप्तपदी, निकाह, आनंद कारज आदि) के अनुसार विवाह करने की पूर्ण स्वतंत्रता रहेगी।
  • कानून लागू होने के बाद सभी विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। पंजीकरण न कराने पर 10 हजार रुपये और नोटिस के बाद भी अनदेखी करने पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लग सकेगा।
  • रजिस्ट्रार को 15 दिनों में प्रमाण पत्र जारी करना या कारण बताते हुए आवेदन खारिज करना होगा। जानबूझकर देरी करने वाले रजिस्ट्रार पर भी 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
  • लिव-इन संबंधों की शुरुआत तथा समापन की लिखित सूचना या पंजीकरण का भी प्रावधान किया गया है।
  • उत्तराधिकार के मामले में पुत्र-पुत्री को समान अधिकार दिए गए हैं। बिना वसीयत मृत्यु होने पर संपत्ति के हस्तांतरण के लिए तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं (प्रथम श्रेणी में पति/पत्नी, बच्चे, मृत बच्चों के परिवार और माता-पिता शामिल हैं)। कोई वारिस न मिलने पर संपत्ति सरकार के पास जाएगी (देनदारियों सहित)। गर्भ में मौजूद शिशु को भी उत्तराधिकार का पूरा अधिकार प्राप्त होगा।

‘द राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल-2026’ को मंजूरी

पर्यावरण एवं जैव विविधता के संरक्षण के लिए ‘द राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल-2026’ को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है, जिसे आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।

  • इस विधेयक के तहत 29 महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों (जैसे- राज्य वृक्ष खेजड़ी, राज्य पुष्प रोहिड़ा, बरगद, पीपल, लसोड़ा, तेंदू, महुआ, कैर और चिरोंजी) के संरक्षण को विशेष बढ़ावा मिलेगा।
  • गैर वन भूमि पर बिना अनुमति इन पेड़ों की कटाई को संज्ञेय और जमानती अपराध बनाया गया है। दोष सिद्ध होने पर एक वर्ष का कारावास या एक लाख रुपये का जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है।
  • कोई भी व्यक्ति अपनी स्वामित्व वाली भूमि पर भी बिना अधिकृत प्राधिकारी की अनुमति के पेड़ नहीं काट सकेगा।
  • यदि अनुमति लेकर वृक्ष काटा जाता है, तो उसी क्षेत्र में निर्धारित संख्या में नए वृक्षों का रोपण करना अनिवार्य होगा।

1971 के युद्ध के 35 शहीदों के परिवारों को मिलेगी आश्रित नौकरी

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध (ऑपरेशन कैक्टस लिली) के दौरान घायल हुए 35 सैनिक, जो 1 जनवरी 1972 से 31 अक्टूबर 1972 के बीच इलाज के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे, उन्हें अब ‘बैटल कैजुअल्टी (फेटल)’ घोषित किया गया है। इन परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के लिए ‘राजस्थान मृत सशस्त्र बल कार्मिक के (शहीद) आश्रितों को नियुक्ति नियम-2022’ में संशोधन किया गया है। योजना का लाभ देने के लिए निर्धारित समयावधि 31 दिसंबर 1971 से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 1972 कर दी गई है।

कर्मचारियों के हित में सेवा नियमों में बड़े बदलाव

उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा ने कार्मिक कल्याण से जुड़े फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि कर्मचारियों को वर्ष 2026-27 में पदोन्नति हेतु वांछित अनुभव में 2 वर्ष की छूट दी जाएगी (केवल उन्हें जिन्हें 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 में यह लाभ नहीं मिला था)। अन्य बड़े फैसलों में शामिल हैं:

  • शासकीय सेवा में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में 4 प्रतिशत आरक्षण का नोशनल बेनेफिट अब 30 जून 2016 से दिया जाएगा।
  • मृत सरकारी कर्मचारियों की अनुकम्पा नियुक्ति हेतु पात्र आश्रितों की सूची में अब ‘पुत्र वधू’ को भी शामिल कर लिया गया है।
  • राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण के दौरान या दो वर्ष के भीतर पद त्यागने पर अब केवल प्रशिक्षण व्यय की वसूली होगी, वेतन-भत्तों की वसूली नहीं की जाएगी। राज्य या केंद्र सरकार के किसी अन्य विभाग में नई नियुक्ति पर जाने पर कोई वसूली (प्रशिक्षण व्यय भी नहीं) नहीं होगी।
  • एकल महिला राज्य कर्मचारियों को चाईल्ड केयर लीव (CCL) एक कैलेण्डर वर्ष में 3 के स्थान पर 6 चरणों में स्वीकृत की जा सकेगी।
  • सरोगेसी के मामलों में सरोगेट मदर को 180 दिन तथा कमीशनिंग मदर को 90 दिन का मातृत्व अवकाश दिया जाएगा।

ग्रामीण जलापूर्ति के लिए संचालन एवं संधारण नीति

ग्रामीण क्षेत्रों में नल से स्वच्छ जल की आपूर्ति के लिए नई ‘संचालन एवं संधारण नीति’ को मंजूरी दी गई है, जिसमें जल जीवन मिशन 2.0 के 19 प्रमुख घटकों को शामिल किया गया है। स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की होगी। तकनीकी मार्गदर्शन के लिए 5-6 पंचायतों पर एक क्लस्टर समिति बनाई जाएगी। इसके वित्तपोषण के लिए वित्त आयोग, विधायक/सांसद निधि और वीबी जी राम जी योजना के फंड का उपयोग किया जाएगा।

विभिन्न भर्ती एवं सेवा नियमों में संशोधन

  • जनजाति क्षेत्रीय विकास (TAD) विभाग में आवासीय विद्यालयों व छात्रावासों में वार्डन (छात्रावास अधीक्षक महिला ग्रेड-2 के 254 पद सहित कुल 470 पद) की भर्ती अब शिक्षा विभाग की प्रतिनियुक्ति के बजाय राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा समान पात्रता परीक्षा (CET) के माध्यम से की जाएगी।
  • राजस्थान वन अधीनस्थ सेवा नियम, 2015 में संशोधन कर वनरक्षक से सहायक वनपाल, सहायक वनपाल से वनपाल एवं सर्वेयर से कनिष्ठ अभियंता के पदों पर पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त किया गया है।
  • समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) नियमों में संयुक्त निदेशक और कार्यक्रम निदेशक/अतिरिक्त निदेशक के नवीन पदनाम जोड़कर पदोन्नति के अतिरिक्त अवसर दिए गए हैं।

उद्योगों, अक्षय ऊर्जा और काश्तकारों को भूमि आवंटन

  • मैसर्स अल्ट्राटेक सीमेन्ट लिमिटेड को जैसलमेर जिले के ग्राम पारेवर में करीब 306 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि आवंटित की गई है।
  • अक्षय ऊर्जा के तहत बीकानेर (ग्राम बरजू) में 228 हेक्टेयर और जैसलमेर (ग्राम रामगढ़ बारानी दक्षिण) में 485 हेक्टेयर भूमि सौर ऊर्जा के लिए दी गई है।
  • जैसलमेर (ग्राम तोगा व नीम्बा) में 178 हेक्टेयर और बाड़मेर (ग्राम लीकड़ी) में 51 हेक्टेयर भूमि सोलर विंड हाइब्रिड परियोजना के लिए आवंटित हुई है।
  • जैसलमेर के उपनिवेशन तहसील नाचना-1 (ग्राम चिन्नू) में एस्केप जलाशय (आरडी 1121) निर्माण से प्रभावित 21 गैर-खातेदार काश्तकारों को अपवाद स्वरूप उसी गांव में भूमि आवंटित करने की मंजूरी दी गई है। वर्ष 1999 में इन किसानों की 722 बीघा जमीन अवाप्ति प्रक्रिया के बिना ली गई थी। यह जलाशय जोधपुर को पीने का पानी उपलब्ध कराने (जल जीवन मिशन) के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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UCC, Rajasthan Cabinet, Bhajanlal Sharma, Tree Protection Bill, Compassionate Appointment, Government Employees, Jal Jeevan Mission, Rajasthan News

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