हरियाणा की पावन धरा, जो सदियों से योद्धाओं और एथलीटों की जननी रही है, ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर एक बार फिर अपना लोहा मनवाया है। उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में आयोजित प्रतिष्ठित वर्ल्ड आर्म रेसलिंग कप 2026 (World Arm Wrestling Cup 2026) में हरियाणा के सिरसा जिले के रहने वाले महज 16 वर्षीय निहाल सिंह ने वह कर दिखाया, जो दिग्गज खिलाड़ियों के लिए भी एक सपना होता है। निहाल ने सीनियर मेंस 60 किग्रा (लेफ्ट हैंड) वर्ग में अकल्पनीय प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक (Bronze Medal) जीतकर इतिहास रच दिया है। उनकी यह सफलता इसलिए और भी ऐतिहासिक है क्योंकि उन्होंने यह मुकाम बिना किसी प्रोफेशनल कोच, बिना किसी महंगे जिम या विश्व स्तरीय ट्रेनिंग सेंटर के हासिल किया है। निहाल की ट्रेनिंग का एकमात्र जरिया यूट्यूब (YouTube) था।
सोशल मीडिया का सकारात्मक इस्तेमाल: मनोरंजन नहीं, भविष्य निर्माण
आज के दौर में जहां अधिकांश युवा सोशल मीडिया का उपयोग केवल मनोरंजन और रील बनाने के लिए करते हैं, सिरसा के इस होनहार युवा ने इसे अपनी किस्मत बदलने का हथियार बनाया। करीब डेढ़ साल पहले निहाल ने यूट्यूब पर आर्म रेसलिंग (पंजा लड़ाने) के वीडियो देखे। इन वीडियो ने उनके अंदर इस खेल के प्रति एक अजीब सा जुनून पैदा कर दिया। उन्होंने तय कर लिया कि उन्हें इसी खेल में देश के लिए कुछ करना है। निहाल ने यूट्यूब पर दुनिया के महान आर्म रेसलर्स के मैच देखने शुरू किए। उन्होंने वीडियो को बार-बार ‘स्लो मोशन’ में चलाकर कलाई की ग्रिप, उंगलियों का दबाव, शरीर का संतुलन और अटैक करने की तकनीक सीखी। उन्होंने किसी प्रोफेशनल एकेडमी में जाने के बजाय, खुद को ही अपना कोच बना लिया।
पिता का संघर्ष और बेटे का समर्पण
निहाल के इस जुनून को उनके परिवार ने बखूबी समझा। विशेष रूप से उनके पिता कुलविंद्र सिंह ने बेटे के सपने को पंख दिए। बेटे के पास अभ्यास करने के लिए कोई प्रोफेशनल टेबल नहीं थी, तो कुलविंद्र सिंह ने मई 2025 में घर पर ही कबाड़ और लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग कर एक प्रोफेशनल आर्म रेसलिंग टेबल तैयार की। यही वह टेबल थी, जिस पर निहाल ने दिन-रात एक कर दिया। बेनेट यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा से कंप्यूटर साइंस (BTech CSE-AI) की पढ़ाई कर रहे निहाल अपनी पढ़ाई और ट्रेनिंग के बीच एक अद्भुत संतुलन बनाकर रखते थे। वे रोजाना घंटों अपनी ग्रिप स्ट्रेंथ (पकड़), कलाई की ताकत और तकनीक पर काम करते थे।
ताशकंद में दिग्गज खिलाड़ियों को दी मात


ताशकंद वर्ल्ड कप में निहाल का मुकाबला दुनिया भर के 26 से अधिक देशों के दिग्गज और अनुभवी आर्म रेसलर्स से था, जो अपने-अपने देशों में प्रोफेशनल कोचों की देखरेख में सालों से ट्रेनिंग ले रहे थे। लेकिन निहाल के पास अदम्य साहस और यूट्यूब से सीखी गई तकनीक थी। सीनियर मेंस 60 किग्रा वर्ग में, जहां उनकी उम्र अन्य खिलाड़ियों की तुलना में काफी कम थी, उन्होंने अपने ‘लेफ्ट हैंड’ के दम पर विरोधियों की कलाई पर ऐसा दबाव बनाया कि अनुभवी खिलाड़ी भी कांप उठे। क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल के कड़े मुकाबलों के बाद, वे फाइनल से चूक गए, लेकिन उन्होंने तीसरे स्थान पर रहकर कांस्य पदक अपने नाम किया। पदक के साथ जब उन्होंने तिरंगा लहराया, तो यह क्षण हर भारतीय के लिए गर्व का था।
भविष्य का लक्ष्य: वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड




सिरसा लौटने पर निहाल सिंह का एक हीरो की तरह भव्य स्वागत किया गया। माता रजनी, बहन डॉ. भव्या और भाई अनमोल चड्ढा अपने लाल की इस सफलता पर फूले नहीं समा रहे थे। शहर के प्रमुख समाजसेवियों, जयदेव-सहदेव जैन चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रधान ललित जैन और लायंस क्लब सिरसा अमर के पदाधिकारियों ने उन्हें सम्मानित किया। कांस्य पदक जीतने के बाद भी निहाल के पैर जमीन पर हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह कांस्य पदक सिर्फ शुरुआत है। मेरा असली लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर राष्ट्रगान बजवाना है।” निहाल का यह सफर आज के हर युवा के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है कि अगर इरादे नेक और मेहनत सच्ची हो, तो संसाधनों की कमी आपको कभी नहीं रोक सकती।
