जयपुर: राजस्थान सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल में देश के अन्य राज्यों से काफी आगे निकल गई है| मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग (DoIT&C) ने अत्याधुनिक ‘फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम’ (Face Similarity Search System) को सफलतापूर्वक लागू किया है| इसके जरिए अब प्रतियोगी परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट, आदतन अपराधियों और लावारिस शवों की पहचान पलक झपकते ही की जा रही है|
परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थियों पर नकेल
प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए इस AI तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल हो रहा है| संदिग्ध अभ्यर्थी के चेहरे का मिलान 50 लाख पंजीकृत अभ्यर्थियों के विशाल डेटाबेस से किया जा रहा है| इस उच्च-सटीकता वाली फेस सिमिलैरिटी प्रणाली से डमी कैंडिडेट पकड़ने में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिल रही है, जिससे निष्पक्ष चयन प्रक्रिया सुनिश्चित हो रही है|
आदतन अपराधियों की तुरंत पहचान
कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद के लिए एक अलग AI सिस्टम काम कर रहा है| इसमें 10 लाख फोटो वाले आपराधिक डेटाबेस का इस्तेमाल किया जा रहा है| इस प्रणाली से किसी भी संदिग्ध की फोटो का मिलान कर उसकी पूरी आपराधिक हिस्ट्री निकाली जा सकती है| इससे अपराध जांच में तेजी आ रही है और आदतन अपराधियों पर निगरानी रखना आसान हो गया है|
लावारिस शवों की त्वरित शिनाख्त
मानवीय दृष्टिकोण और जनसेवा के तहत यह तकनीक बहुत उपयोगी साबित हो रही है| अज्ञात और लावारिस शवों के फोटोग्राफ का गुमशुदा व्यक्तियों के डेटाबेस से मिलान कर उनकी तुरंत शिनाख्त की जा रही है|
पूर्ण सुरक्षित और पारदर्शी सिस्टम
सूचना प्रौद्योगिकी आयुक्त हिमांशु गुप्ता ने बताया कि यह प्रणाली पूरी तरह से सुरक्षित है| इसे राजस्थान स्टेट डेटा सेंटर के ‘एयर-गैप्ड’ वातावरण में डिप्लॉय किया गया है| इसमें डेटा की निजता, सुरक्षा ऑडिट और नैतिक उपयोग के सभी मानकों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है|
