कोटा/जयपुर। राजस्थान के सरकारी और निजी विधि महाविद्यालयों (Law Colleges) में इस वर्ष प्रवेश लेने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों के लिए बुरी खबर है। प्रदेश के करीब 84 लॉ कॉलेजों की संबद्धता (Affiliation) प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है, जिसके कारण नए शैक्षणिक सत्र की प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह से ठप पड़ी है।
दिसंबर में होना था निरीक्षण, मार्च तक भी शुरू नहीं
नियमानुसार, कॉलेजों के निरीक्षण की प्रक्रिया हर वर्ष दिसंबर तक पूरी कर ली जानी चाहिए, लेकिन मार्च का आधा महीना बीतने के बाद भी अभी तक निरीक्षण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। इसके चलते डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय द्वारा कॉलेजों को संबद्धता पत्र जारी नहीं किए गए हैं। विवि ने सितंबर 2025 में ही निरीक्षण और संबद्धता के नाम पर कॉलेजों से लाखों रुपए की फीस जमा करवा ली थी, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
BCI को रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य
शिक्षाविद् शिप्रा गुप्ता और प्राचार्य आर.के. उपाध्याय के अनुसार, विधि महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय से संबद्धता पत्र मिलने के बाद उसे बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को सौंपना अनिवार्य होता है। बीसीआई से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए आगामी सत्र की प्रवेश प्रक्रिया में भारी देरी होने की संभावना है।
कॉलेजों पर पेनल्टी का खतरा
महाविद्यालय संचालकों का कहना है कि यदि समय पर निरीक्षण और संबद्धता नहीं मिलती है, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ेगा। इसके साथ ही, बीसीआई की ओर से देरी के लिए संस्थानों पर भारी पेनल्टी भी लगाई जा सकती है, जिससे कॉलेजों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा।
अधिकारियों का पक्ष
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार वीरेंद्र वर्मा के अनुसार, एनओसी में देरी के कारण कॉलेजों के निरीक्षण और संबद्धता की प्रक्रिया में देरी हुई है। हालांकि, विश्वविद्यालय का दावा है कि अब इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि शैक्षणिक सत्र बिना किसी बाधा के शुरू हो सके।
