Teachers Day: ‘आदर्श प्राध्यापक’ विषय पर संगोष्ठी, राष्ट्र निर्माण में गुरु की भूमिका पर चर्चा | Bharatpur News

शिक्षक दिवस: 'आदर्श प्राध्यापक' विषय पर संगोष्ठी

भरतपुर, राजस्थान: राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर, महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। “प्रो. यशवंतराव केलकर जी – आदर्श प्राध्यापक” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी का उद्देश्य शिक्षकों की गरिमा और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने की, जबकि अभाविप के प्रांत संगठन मंत्री श्री पूरण सिंह शाहपुरा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के भरतपुर विभाग प्रचारक श्री उत्कर्ष विशेष रूप से उपस्थित रहे।


प्रो. केलकर जी: एक श्रेष्ठ प्राध्यापक और राष्ट्रनिर्माता

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए अभाविप के प्रांत संगठन मंत्री पूरण सिंह शाहपुरा ने प्रो. यशवंतराव केलकर जी के जीवन, उनके आदर्शों और शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रो. केलकर जी केवल एक श्रेष्ठ प्राध्यापक ही नहीं, बल्कि एक सच्चे मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत थे, जिन्होंने विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु शिक्षा को जीवन से जोड़ने का कार्य किया। शाहपुरा ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक सशक्त आधार है।

Teachers Day: ‘आदर्श प्राध्यापक’ विषय पर संगोष्ठी

गुरु: भारतीय संस्कृति में सर्वोच्च स्थान

विभाग प्रचारक श्री उत्कर्ष ने भारतीय परंपरा में गुरु के सर्वोच्च स्थान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद और गीता जैसे महान ग्रंथों में गुरु को ईश्वर के तुल्य बताया गया है – “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः।” उत्कर्ष ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय परंपरा में शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं रही है, बल्कि यह जीवन मूल्यों, नैतिकता और कर्तव्यबोध का आधार रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में भी शिक्षक का यह दायित्व है कि वह छात्रों को केवल रोजगारपरक शिक्षा न देकर उन्हें जिम्मेदार नागरिक और आदर्श मानव बनने की दिशा में प्रेरित करें।


शिक्षक: राष्ट्र की आत्मा का शिल्पकार

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर त्रिभुवन शर्मा ने शिक्षक की भूमिका को राष्ट्र निर्माण के संदर्भ में परिभाषित किया। उन्होंने कहा, “आज के परिवर्तित परिदृश्य में शिक्षक की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण के संकल्प को साकार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी है।” उन्होंने शिक्षक को समाज की आत्मा को आकार देने वाला शिल्पकार बताया, जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, मूल्य एवं संस्कारों का निर्माण करते हैं। प्रोफेसर शर्मा ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शब्दों को दोहराते हुए कहा कि, “सच्चा शिक्षक वह है, जो अपने ज्ञान से छात्र के व्यक्तित्व का निर्माण कर उसे आदर्श नागरिक बनाता है।”

संगोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया कि एक सशक्त, शिक्षित और संस्कारित नागरिक ही राष्ट्र निर्माण का आधार हैं, और ऐसे नागरिकों को गढ़ने का दायित्व शिक्षकों पर ही होता है।

Teachers Day: ‘आदर्श प्राध्यापक’ विषय पर संगोष्ठी

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