भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मुख्य रणनीतिकार और ‘आधुनिक राजनीति के चाणक्य’ के नाम से मशहूर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का कद आज देश के सबसे कद्दावर नेताओं में गिना जाता है। लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि राजनीति में आने से पहले यह दिग्गज नेता क्या काम किया करते थे, जिसने उन्हें संगठन और प्रबंधन की ऐसी गहरी समझ दी।
अमित शाह की पृष्ठभूमि किसी विशुद्ध राजनेता की नहीं, बल्कि एक पेशेवर व्यापारी और बैंकर की रही है। उनका शुरुआती जीवन और करियर वित्त, कारोबार और सहकारिता से जुड़ा रहा, जिसने उनके राजनीतिक कौशल को एक मजबूत आधार प्रदान किया।
1. प्रारंभिक जीवन और शिक्षा की नींव
अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई के एक समृद्ध गुजराती परिवार में हुआ था।
- बचपन और स्कूलिंग: उन्होंने अपना बचपन और शुरुआती स्कूली शिक्षा गुजरात में अपने पैतृक गांव मानसा (मेहसाणा) में पूरी की।
- कॉलेज और डिग्री: स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उनका परिवार अहमदाबाद चला गया, जहां उन्होंने सीयू शाह साइंस कॉलेज में दाखिला लिया। उन्होंने जैव रसायन (Biochemistry) विषय में बीएससी (B.Sc.) की डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
राजनीतिक रूप से उनका जुड़ाव काफी कम उम्र में ही शुरू हो गया था। उन्होंने 16 वर्ष की आयु (1980) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक के रूप में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया और बाद में छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से भी जुड़े।
2. कॉर्पोरेट जगत और व्यापार में प्रवेश
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, शाह ने अपने परिवार के कारोबार को संभालने का फैसला किया।
पिता का कारोबार
- शाह के पिता अनिलचंद्र शाह का गुजरात के मानसा में प्लास्टिक के पाइप का एक सफल कारोबार था। युवा अमित शाह ने इस पारिवारिक व्यवसाय को संभाला और प्रबंधन का पहला अनुभव प्राप्त किया।
शेयर ब्रोकर (Stockbroker) के रूप में काम
- पारिवारिक व्यवसाय के साथ-साथ, अमित शाह ने अहमदाबाद में एक स्टॉक ब्रोकर (शेयर दलाल) के रूप में भी काम किया। शेयर बाजार की समझ ने उन्हें वित्तीय जोखिमों को आंकने और बड़े निवेशों को प्रबंधित करने की गहरी अंतर्दृष्टि दी, जो आगे चलकर उनकी राजनीतिक रणनीति में भी काम आई।
3. सहकारिता क्षेत्र का महत्वपूर्ण मोड़: ADCB का कायापलट
अमित शाह के करियर का सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण दौर सहकारिता (Co-operative) क्षेत्र में रहा।
- अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक (ADCB): वर्ष 2000 में, महज 36 वर्ष की आयु में, अमित शाह को अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक (ADCB) का अध्यक्ष बनाया गया।
- हानि से लाभ तक: जब उन्होंने बैंक का कार्यभार संभाला, तब बैंक भारी घाटे में था और बंद होने की कगार पर था। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, बैंक पर लगभग 20.28 करोड़ रुपये का घाटा था। शाह ने अपनी वित्तीय समझ और प्रबंधन कौशल का उपयोग करके मात्र एक वर्ष के भीतर बैंक का कायापलट कर दिया।
- सफलता: उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप, ADCB ने न केवल घाटे की भरपाई की, बल्कि अगले ही वर्ष 6.60 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया और शेयरधारकों को 10 प्रतिशत लाभांश भी वितरित किया।
एक घाटे में चल रहे बैंक को मुनाफे में बदलने की यह सफलता उनकी संगठनात्मक और वित्तीय प्रबंधन क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण बनी, जिसने उन्हें राजनीति और शासन में आगे बढ़ने के लिए एक मजबूत आधार दिया।
4. राजनीति में औपचारिक प्रवेश
व्यापार और बैंकिंग में सक्रिय रहते हुए ही, अमित शाह ने 1980 के दशक के मध्य में बीजेपी में औपचारिक रूप से प्रवेश किया।
- बीजेपी में एंट्री: वह 1986 में बीजेपी में शामिल हुए और 1987 में पार्टी की युवा शाखा, भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के सक्रिय कार्यकर्ता बन गए।
- मोदी से मुलाकात: उनकी मुलाकात नरेंद्र मोदी से 1982 के आसपास अहमदाबाद के आरएसएस सर्किलों में हुई थी, जिसके बाद उनकी राजनीतिक यात्रा को नई दिशा मिली।
इस प्रकार, बीजेपी के ‘चाणक्य’ अमित शाह ने राजनीति में आने से पहले एक व्यवसायी, शेयर ब्रोकर और सफल बैंकर के रूप में अपनी योग्यता सिद्ध की। उनकी यही वित्तीय और संगठनात्मक समझ उनकी राजनीतिक सफलता की आधारशिला बनी।
