नई दिल्ली | आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में देश के करोड़ों गरीब बैंक खाताधारकों की आवाज उठाई है। उन्होंने बैंकों की ओर से वसूले जा रहे ‘मिनिमम अकाउंट बैलेंस’ (Minimum Account Balance) जुर्माने को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला आंकड़ा सदन के सामने रखा है। उनके अनुसार, पिछले तीन सालों में देश के विभिन्न बैंकों ने आम जनता के खातों से 19,000 करोड़ रुपये केवल इसलिए काट लिए क्योंकि उनके खातों में न्यूनतम जमा राशि नहीं थी।
राघव चड्ढा ने सरकार और बैंकिंग सिस्टम पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह भारी-भरकम जुर्माना अमीरों या बड़े कर्जदारों से नहीं वसूला गया है। यह पैसा सीधे तौर पर सिस्टम के सबसे गरीब लोगों की जेब से निकाला गया है। उनका सबसे बड़ा अपराध केवल इतना है कि उनके पास बैंक खाते में रखने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं था। गरीब इंसान अपनी छोटी सी बचत को सुरक्षा के लिए बैंकों में रखता है, न कि अपनी गरीबी के कारण चुपचाप जुर्माना भरने के लिए।
संसद में अपनी बात रखते हुए उन्होंने आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों का बेहद सटीक उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जब कोई किसान अपने खाते में न्यूनतम बैलेंस नहीं रख पाता, तो बैंक उस पर पेनल्टी लगा देते हैं। कोई बुजुर्ग पेंशनर अपनी बीमारियों की दवाइयों के लिए पैसे निकालता है और बैलेंस कम हो जाता है, तो उसे जुर्माना देना पड़ता है। इसी तरह, यदि किसी दिहाड़ी मजदूर के खाते में कुछ सौ रुपये कम पड़ जाते हैं, तो बैंक उसे भी दंडित करते हैं।
सांसद ने स्पष्ट किया कि असली ‘वित्तीय समावेशन’ (Financial Inclusion) का उद्देश्य छोटी बचत की सुरक्षा करना होना चाहिए, न कि कम बैलेंस रखने पर गरीब जनता को सजा देना। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने संसद में पुरजोर मांग रखी कि न्यूनतम बैलेंस पर लगने वाले सभी प्रकार के जुर्मानों को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सिस्टम को लोगों से उनकी गरीबी की कीमत वसूलना बंद करना चाहिए।
