पद्म पुरस्कार 2026: राजस्थान की झोली में 3 पद्मश्री, भपंग के जादूगर गफरुद्दीन और अलगोजा वादक तगा राम का सम्मान, देखें विजेताओं की पूरी कुंडली

जयपुर। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित हुए पद्म पुरस्कारों (Padma Awards 2026) में राजस्थान की संस्कृति और सेवा भाव का डंका बजा है। केंद्र सरकार ने राजस्थान की 3 विभूतियों को प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बताया है।

ये पुरस्कार उन ‘अनसंग हीरोज’ (Unsung Heroes) को मिले हैं, जिन्होंने चकाचौंध से दूर रहकर अपनी कला और सेवा को जीवित रखा। आइये जानते हैं इन तीनों विजेताओं के बारे में विस्तार से:

1. गफरुद्दीन मेवाती जोगी: भपंग के जादूगर (क्षेत्र: कला)

अलवर-भरतपुर के मेवात क्षेत्र से आने वाले गफरुद्दीन मेवाती जोगी लोक संगीत की एक जीती-जागती मिसाल हैं।

  • भपंग के उस्ताद: वे दुर्लभ वाद्ययंत्र ‘भपंग’ (Bhapang) बजाने में महारत रखते हैं, जो शिवजी के डमरू जैसा दिखता है लेकिन इसका ‘गुटर-गुटर’ स्वर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
  • पांडुन का कड़ा: गफरुद्दीन दुनिया के इकलौते ऐसे कलाकार माने जाते हैं, जिन्हें ‘पांडुन का कड़ा’ (Pandun Ka Kada) (महाभारत की लोक कथाएं) की 2,500 से ज्यादा कड़ियां जुबानी याद हैं। वे पिछले 60 वर्षों से इस विधा को जीवित रखे हुए हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय पहचान: उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी किया है। वे जोगी परंपरा और मेवाती संस्कृति के सच्चे संवाहक हैं।

2. तगा राम भील: रेतीले धोरों का सुर (क्षेत्र: कला)

जैसलमेर के तगा राम भील की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।

  • चरवाहे से कलाकार तक: तगा राम बचपन में बकरियां चराते थे। 13 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता से चोरी-छिपे अलगोजा (Algoza) (दो बांसुरियों वाला वाद्य) बजाना सीखा था।
  • वैश्विक गूंज: आज वे अलगोजा के अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार हैं। उन्होंने 15 से ज्यादा देशों (जैसे फ्रांस, जापान, रूस) में अपनी प्रस्तुति दी है।
  • कारीगर भी: तगा राम केवल बजाते ही नहीं, बल्कि खुद बेहतरीन अलगोजा बनाते भी हैं। उनकी सांसों के दम पर बजने वाला यह वाद्य राजस्थानी लोक संगीत की आत्मा है।

3. स्वामी ब्रह्मदेव जी महाराज: सेवा का पर्याय (क्षेत्र: सामाजिक कार्य)

समाज सेवा के क्षेत्र में स्वामी ब्रह्मदेव को पद्मश्री से नवाजा जाएगा।

  • जीवन दर्शन: स्वामी ब्रह्मदेव श्री अरबिंदो (Sri Aurobindo) और ‘द मदर’ की शिक्षाओं के अनुयायी हैं। उन्होंने अपना जीवन समग्र योग (Integral Yoga) और मानव चेतना के विकास के लिए समर्पित कर दिया है।
  • शिक्षा और सेवा: वे ऑरोवैली आश्रम (Aurovalley Ashram) के संस्थापक हैं, जहाँ वे शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण कल्याण के कार्यों के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों की सेवा कर रहे हैं। उनका मानना है कि असली आध्यात्मिकता मानव सेवा में ही है।

विशेष उल्लेख: पीयूष पांडे (पद्म भूषण)

इसके अलावा, जयपुर में जन्मे और विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडे को मरणोपरांत पद्म भूषण (Padma Bhushan) देने की घोषणा की गई है। हालांकि, तकनीकी रूप से उनका चयन ‘राजस्थान मूल’ (Rajasthan Origin) के तौर पर हुआ है (संभवतः महाराष्ट्र कोटे से), लेकिन उनकी जड़ें राजस्थान से ही जुड़ी थीं। उन्होंने ‘फेविकोल’ और ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ जैसे अभियानों से देश को नई पहचान दी थी।

सीएम ने कहा- “प्रेरणादायक है इनका जीवन”

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तीनों पद्मश्री विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि गफरुद्दीन जी और तगा राम जी ने हमारी लोक कला को सहेजा है, जबकि स्वामी ब्रह्मदेव जी ने सेवा का मार्ग दिखाया है। यह सम्मान युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और राष्ट्र सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।

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