जयपुर। राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं को ‘बूस्टर डोज’ देते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) की सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में अब डॉक्टर्स की कमी काफी हद तक दूर होगी। सरकार ने राज्य के 10 मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट (Senior Resident) के 298 नए पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है।
चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों को होगा लाभ
चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को वित्त विभाग ने हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के दोहरे फायदे होंगे:
- मरीजों को राहत: अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स (सीनियर रेजिडेंट्स) की संख्या बढ़ने से ओपीडी, इमरजेंसी और ऑपरेशन थिएटर में मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा।
- छात्रों को अवसर: यह फैसला विशेष रूप से नीट पीजी (NEET PG) और सुपर स्पेशियलिटी बैच-2022 के छात्रों को ध्यान में रखकर लिया गया है। बॉण्ड के तहत इन छात्रों को 2 साल की अनिवार्य सीनियर रेजिडेंसी (SR-ship) करनी होती है। नए पद सृजित होने से उन्हें अपनी सेवाएं देने और अनुभव प्राप्त करने का मौका मिलेगा।
किस मेडिकल कॉलेज को कितने पद मिले?
चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल ने जिलेवार पदों का ब्यौरा दिया है। जयपुर और जोधपुर के मेडिकल कॉलेजों को सबसे ज्यादा पद मिले हैं:
- जयपुर: 82 पद
- जोधपुर: 78 पद
- उदयपुर: 58 पद
- बीकानेर: 27 पद
- कोटा: 23 पद
- झालावाड़: 11 पद
- अजमेर: 07 पद
- पाली: 06 पद
- भरतपुर: 04 पद
- डूंगरपुर: 02 पद
प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि इससे न केवल ‘स्वास्थ्य सबके लिए’ नीति को बल मिलेगा, बल्कि युवा डॉक्टरों को अपने ही राज्य में करियर बनाने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
