“सपनों की पतंग”: मजबूत इरादों और हौसलों की उड़ान भरती सपना ‘राधांशी’ की नई कविता; पढ़िए जीवन को नई दिशा देने वाली पंक्तियां

मकर संक्रांति के इस पावन पर्व पर आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सजा है। लेकिन असली उड़ान वह है जो हम अपने सपनों के लिए भरते हैं। आज की यह विशेष कविता उन सभी के लिए, जिनके इरादे मजबूत हैं और जो आसमान की ऊंचाइयों को छूने का हौसला रखते हैं। सपना ‘राधांशी’ जी की कलम से निकली यह पंक्तियां आपको जीवन में कभी हार न मानने की प्रेरणा देंगी।

पढ़िए यह जोश से भरी रचना 👇

🪁 सपनों की पतंग 🪁

ऐसी पतंग उड़ाएंगे जिसकी डोर मजबूत इरादों से बनाएंगे………
यह पतंग उड़ने को तैयार रहेगी,
फिर चाहे आंधी–तूफान ही क्यों ना आए लेकिन नीचे नहीं गिरेगी!

बुलंद हौंसला इसकी पहचान बनेगा,
अब आसमान में उड़ना आसान रहेगा!
हमारी पतंग का मुकाम सबसे ऊंचा उड़ना होगा,
बढ़ती पतंग की पहल देखकर कितनी ही पतंगों का काफिला साथ होगा!

अब हवाएं ही तय करेंगी पतंग किस दिशा में उड़ेगी,
जिस भी दिशा में उड़ेगी आसमान छू ही लेगी!
किसी को ग़ुमाँ रहेगा कि पतंग की उड़ान कम रहेगी,
हमें यक़ीन है कि उड़ने लगे तो ये आसमान भी कुछ कम रहेगा!

वक्त आने पर आसमान छूकर उड़ती पतंग दिखाएंगे,
हम अभी ये क्यूं बताएं कि पतंग कौनसी उड़ाएंगे….
ऐसी पतंग उड़ाएंगे जिसकी डोर मजबूत इरादों से बनाएंगे….. 🪁!

✒️ रचयिता: ~ सपना ‘राधांशी’

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