विदेश से MBBS करने वालों को बड़ा झटका: जितनी ऑनलाइन क्लास ली, उतनी दोबारा करनी होगी ऑफलाइन पढ़ाई

जयपुर। कोरोना महामारी के दौरान विदेश से मेडिकल की पढ़ाई (MBBS) करने वाले छात्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने आदेश जारी किया है कि जिन विदेशी मेडिकल छात्रों (FMG) ने अपने कोर्स का कोई भी हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से पूरा किया है, उन्हें अब उसकी भरपाई के लिए समान अवधि की फिजिकल ऑनसाइट (ऑफलाइन) क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग लेनी होगी। ऐसा न करने पर स्टेट मेडिकल काउंसिल (SMC) उन्हें भारत में प्रैक्टिस के लिए ‘परमानेंट रजिस्ट्रेशन’ नहीं देगी।

राजस्थान मेडिकल काउंसिल की सख्त कार्रवाई

एनएमसी सचिव डॉ. राघव लांगर द्वारा राज्यों को भेजे गए आदेशों के बाद राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) ने भी 12 मार्च 2026 को आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। आरएमसी ने स्पष्ट किया है कि एनएमसी की गाइडलाइन का सख्ती से पालन किया जाएगा। यदि किसी छात्र ने ऑनलाइन पढ़ाई के बाद ऑफलाइन क्लास या ट्रेनिंग का वैलिड सर्टिफिकेट जमा नहीं किया, तो उसका परमानेंट रजिस्ट्रेशन रोक दिया जाएगा।

NMC को क्यों उठाना पड़ा यह कदम?

आयोग ने 5 मार्च 2026 को जारी पब्लिक नोटिस का हवाला देते हुए साफ किया कि यदि किसी छात्र ने एक शैक्षणिक वर्ष ऑनलाइन पढ़ाई की है, तो उसकी भरपाई बिना कुल पढ़ाई की अवधि बढ़ाए नहीं की जा सकती। NMC के संज्ञान में आया था कि कुछ विदेशी मेडिकल संस्थान छात्रों को बिना वास्तविक ऑफलाइन ट्रेनिंग करवाए ही “कम्पेनसेशन सर्टिफिकेट” (Compensation Certificate) जारी कर रहे हैं। आयोग ने दो-टूक कहा है कि ऐसे फर्जी सर्टिफिकेट नियमों के विपरीत माने जाएंगे और इनसे प्राप्त डिग्री भारत में अमान्य होगी। यह नियम मुख्य रूप से 2020 और 2021 बैच के छात्रों पर लागू हो रहा है।

छात्रों में आक्रोश, दिल्ली में किया एकजुटता का आह्वान

इस आदेश ने हजारों FMG (Foreign Medical Graduates) छात्रों का भविष्य अधर में डाल दिया है। कजाकिस्तान के अल्माटी से एमबीबीएस करके लौटीं जयपुर की डॉ. किरन ने सवाल उठाते हुए कहा, “जब भारत के मेडिकल कॉलेजों में हुई ऑनलाइन क्लास को स्वीकार किया गया है, तो फिर विदेश की ऑनलाइन क्लास को अस्वीकार कैसे किया जा सकता है? एनएमसी को छात्रों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।”

इन आदेशों के खिलाफ छात्रों ने एकजुट होकर आंदोलन छेड़ दिया है। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली स्थित एनएमसी मुख्यालय पर एकत्र हुए, ताकि अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखकर नियमों में छूट की अपील कर सकें।

विदेशी MBBS छात्रों के लिए भारत में प्रैक्टिस के नियम:

  1. सबसे पहले FMGE (स्क्रीनिंग टेस्ट) पास करना अनिवार्य है।
  2. इसके बाद भारत में एक वर्ष की अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप (CRMI) पूरी करनी होगी।
  3. संबंधित स्टेट मेडिकल काउंसिल (SMC) और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय सभी दस्तावेजों और ऑफलाइन क्लिनिकल ट्रेनिंग की जांच करने के बाद ही स्थायी (Permanent) रजिस्ट्रेशन जारी करेंगे।

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