कल (महाशिवरात्रि) देशभर में ‘बम-बम भोले’ की गूंज रहेगी। मरुधरा यानी राजस्थान में भी शिव भक्ति का अनूठा रंग देखने को मिलेगा। अगर आप इस महाशिवरात्रि पर विशेष दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो हम आपको बता रहे हैं राजस्थान के उन 5 चमत्कारी और ऐतिहासिक शिव मंदिरों के बारे में, जिनकी मान्यताएं देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं।
1. एकलिंगजी मंदिर (उदयपुर): मेवाड़ के आराध्य

उदयपुर के पास स्थित एकलिंगजी मंदिर मेवाड़ राजघराने के आराध्य देव का स्थान है।
- खासियत: यहाँ भगवान शिव चार मुखों वाले शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं।
- मान्यता: महाशिवरात्रि पर यहाँ विशेष श्रृंगार और रात्रि जागरण होता है। माना जाता है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है।
2. अचलेश्वर महादेव (माउंट आबू): जहाँ अंगूठे की होती है पूजा

अरावली की पहाड़ियों में स्थित यह मंदिर अपने आप में एक रहस्य है।
- रहस्य: यहाँ शिवलिंग की नहीं, बल्कि भगवान शिव के पैर के अंगूठे की पूजा की जाती है।
- कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब नंदीवर्धन पर्वत (माउंट आबू) डगमगाने लगा था, तब भगवान शिव ने अपने अंगूठे से ही इसे थामकर स्थिर किया था।
3. परशुराम महादेव (पाली): ‘राजस्थान का अमरनाथ’

पाली जिले में अरावली की कंदराओं में स्थित परशुराम महादेव मंदिर को ‘राजस्थान का अमरनाथ’ कहा जाता है।
- स्थान: यह मंदिर एक प्राकृतिक गुफा में स्थित है। यहाँ तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
- इतिहास: मान्यता है कि भगवान परशुराम ने स्वयं यहाँ फरसे से चट्टान काटकर गुफा बनाई थी और कठोर तपस्या की थी।
4. घुश्मेश्वर महादेव (सवाई माधोपुर): 12वां ज्योतिर्लिंग?

शिवाड़ स्थित घुश्मेश्वर (घृष्णेश्वर) महादेव मंदिर की महिमा अपरंपार है। शिव पुराण में वर्णित 12वें ज्योतिर्लिंग को लेकर कई श्रद्धालु इसे ही असली स्थान मानते हैं। यहाँ महाशिवरात्रि पर विशाल मेला लगता है और दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है।
5. बेणेश्वर धाम (डूंगरपुर): आदिवासियों का महाकुंभ

सोम, माही और जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित बेणेश्वर धाम आदिवासी आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है।
- दर्शन: यहाँ का मुख्य आकर्षण स्वयंभू शिवलिंग है, जो किसी ने स्थापित नहीं किया बल्कि स्वयं प्रकट हुआ था। महाशिवरात्रि पर यहाँ दूर-दूर से भक्त जलाभिषेक के लिए पहुँचते हैं।
