राजधानी जयपुर के बजाज नगर में शनिवार को ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ का आयोजन पूरे उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस भव्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए, जबकि गलता पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी राघवेंद्राचार्य का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ। दोनों वक्ताओं ने समाज में समरसता, स्वदेशी और राष्ट्र प्रथम की भावना को प्रबल करने का संदेश दिया।
सांस्कृतिक चेतना जीवित रखते हैं ऐसे आयोजन: स्वामी राघवेंद्राचार्य
अपने आशीर्वचन में स्वामी राघवेंद्राचार्य ने कहा कि इस तरह के आयोजन ही समाज की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखते हैं। उन्होंने भारत की प्राचीन सभ्यता और वर्ण व्यवस्था की मूल भावना पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक समरसता को समय की मांग बताया। उन्होंने जोर देकर कहा, “समाज को किसी भी प्रकार के विभाजन से बचाकर एकता की दिशा में आगे बढ़ना अत्यंत आवश्यक है।”
पुलवामा के शहीदों को नमन, ‘राष्ट्र प्रथम’ का संकल्प
मुख्य वक्ता निम्बाराम ने अपने उद्बोधन की शुरुआत 14 फरवरी को पुलवामा हमले में शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल जयपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में इस तरह के सम्मेलन आयोजित हो रहे हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध का संदेश दिया।
‘पंच परिवर्तन’ से आएगा बदलाव
निम्बाराम ने समाज को सशक्त बनाने के लिए ‘पंच परिवर्तन’ (Five Transformations) को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने इन पांच सूत्रों पर विशेष जोर दिया:
- राष्ट्र प्रथम की भावना: हर कार्य में देशहित सर्वोपरि हो।
- हिंदू समाज की एकता: समाज संगठित और एकरस रहे।
- स्वदेशी का उपयोग: विदेशी वस्तुओं का मोह त्यागकर स्थानीय उत्पादों को अपनाएं।
- पर्यावरण संरक्षण: सिंगल यूज़ प्लास्टिक का पूर्ण त्याग करें।
- नागरिक कर्तव्य और सामाजिक समरसता: नियमों का पालन और व्यवहार में समानता।
सनातन यानी जो कभी समाप्त न हो
उन्होंने कहा कि सनातन का अर्थ है जो शाश्वत है और कभी समाप्त नहीं होता। विविधता में एकता ही हिंदू समाज की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने परिवारों में संस्कार, परंपरा और नियमित संवाद (Communication) की आवश्यकता पर बल दिया।
भोजन की बर्बादी रोकें, वंचितों को गले लगाएं
अंत में उन्होंने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करना, भोजन की बर्बादी रोकना और समाज के वंचित वर्गों को अपने साथ जोड़ना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति आस्था रखना हर नागरिक का धर्म है।
