मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की तकदीर बदलने के लिए बड़े फैसले ले रही है। प्रदेश में अब रसायनों पर निर्भरता कम कर टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘प्राकृतिक खेती’ को एक नई दिशा दी जा रही है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि किसान रसायन-मुक्त खेती की ओर बढ़ें, जिससे न केवल मिट्टी की उपजाऊ शक्ति सुधरे और खेती की लागत कम हो, बल्कि किसानों की आय में भी इजाफा हो और उन्हें फसल का अधिकतम उत्पादन मिल सके।
बजट में बड़ा ऐलान: ढाई लाख किसानों को सीधा लाभ
इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 के बजट में एक व्यापक और दूरदर्शी कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत प्रदेश के 2 लाख 50 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जा रहा है। इसमें से राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 2.25 लाख किसानों को केंद्र (60 प्रतिशत) और राज्य (40 प्रतिशत) की साझेदारी से मदद मिलेगी। वहीं, अतिरिक्त 25 हजार किसानों को राज्य सरकार अपने स्तर पर शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बोझ के इस नई पद्धति को अपना सकें।
क्लस्टर मॉडल और ‘कृषि सखियों’ की तैनाती
योजना को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने संगठित तरीका अपनाया है। राज्य के सभी जिलों में 1 लाख हैक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए 2 हजार क्लस्टर बनाए गए हैं। हर क्लस्टर में 50 हैक्टेयर क्षेत्र और 125 किसान शामिल हैं। मिशन की सफलता के लिए उदयपुर स्थित प्राकृतिक खेती केंद्र में विभागीय अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और किसान मास्टर ट्रेनरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इतना ही नहीं, हर क्लस्टर में किसानों की मदद और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा प्रशिक्षित ‘कृषि सखी’ या सीआरपी (CRP) की नियुक्ति की गई है, जो किसानों को जागरूक कर रही हैं।
खाद के लिए 4 हजार रुपये और बायो इनपुट सेंटर
प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार किसानों को आर्थिक संबल भी दे रही है। चयनित किसानों को प्रति एकड़ 4 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते (DBT) में भेजी जा रही है। यह राशि खेत पर ही प्राकृतिक खाद और अन्य इनपुट तैयार करने का बुनियादी ढांचा खड़ा करने में मदद करेगी। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक उर्वरक आसानी से मिल सकें, इसके लिए कृषि विभाग ‘बायो इनपुट संसाधन केंद्र’ स्थापित कर रहा है। कार्ययोजना के तहत प्रत्येक केंद्र के लिए 1 लाख रुपये का प्रावधान है और अब तक ऐसे 180 केंद्र स्थापित भी हो चुके हैं। सरकार की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में राज्य को नई पहचान दिलाएगी।
