राजस्थान युवा नीति-2026: युवाओं को ‘लाभार्थी’ नहीं ‘भागीदार’ बनाएगी सरकार, 7 प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस, विभागों को मिला रोडमैप

जयपुर। राज्य सरकार ने प्रदेश के युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए तैयार की गई ‘राज्य युवा नीति–2026’ (State Youth Policy-2026) को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली है। इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल (Coordination) सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में राजस्थान युवा बोर्ड की एक महत्वपूर्ण अंतर्विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई।

युवा मामले एवं खेल विभाग के शासन सचिव और राजस्थान युवा बोर्ड के अध्यक्ष नीरज के. पवन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में नीति के विजन, उद्देश्यों और रणनीतिक ढांचे पर विस्तार से मंथन किया गया।

विजन: युवा केवल ‘लाभार्थी’ नहीं, विकास के ‘सहभागी’ बनेंगे

बैठक को संबोधित करते हुए शासन सचिव नीरज के. पवन ने नीति की मूल भावना को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “राज्य युवा नीति–2026 का उद्देश्य युवाओं को केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी (Beneficiary) के रूप में देखना नहीं है, बल्कि उन्हें विकास प्रक्रिया का सक्रिय सहभागी (Active Partner) बनाना है।”

उन्होंने बताया कि इस नीति में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को केंद्र में रखा गया है। इसके जरिए समावेशी, नवाचार-आधारित और परिणाम देने वाले दृष्टिकोण को अपनाया जाएगा, जिससे युवाओं में नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित हो सके।

2026 से 2031 तक के लिए 7 ‘फोकस एरिया’ निर्धारित

शासन सचिव ने बताया कि नीति के तहत सात एकीकृत फोकस क्षेत्रों (7 Integrated Focus Areas) पर विशेष जोर दिया जाएगा। इनके लिए वर्ष 2026 से 2031 तक के लिए ‘मापनीय लक्ष्य’ (Measurable Goals) तय किए गए हैं, जिनकी प्राप्ति के लिए नियमित समीक्षा की जाएगी। ये 7 क्षेत्र इस प्रकार हैं:

  1. नेतृत्व एवं सामाजिक जिम्मेदारी: युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वैच्छिक सेवा, सामुदायिक सहभागिता और राष्ट्र निर्माण से जोड़ा जाएगा।
  2. डिजिटल सशक्तिकरण एवं नवाचार: युवाओं की डिजिटल साक्षरता बढ़ाने, उभरती तकनीकों में दक्ष बनाने और स्टार्ट-अप संस्कृति व नवाचार आधारित समाधान विकसित करने पर जोर दिया गया।
  3. शिक्षा एवं कौशल विकास: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, उद्योगों की मांग के अनुसार कौशल विकास (Industry-friendly skills) और आजीवन सीखने की अवधारणा को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  4. रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार: युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना, स्वरोजगार और स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देना, साथ ही उन्हें वित्तीय और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराना।
  5. खेल, स्वास्थ्य एवं कल्याण: युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस, खेल के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का विकास, फिटनेस, पोषण और नशा-मुक्ति अभियान।
  6. संस्कृति, विरासत एवं कला: युवाओं को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला, पर्यटन और रचनात्मक उद्योगों से जोड़ना।
  7. समावेशन एवं सामाजिक समानता: महिला, दिव्यांग, अनुसूचित जाति, जनजाति और वंचित वर्गों के युवाओं को समान अवसर देकर उन्हें मुख्यधारा में लाना।

विभागों को निर्देश: लक्ष्यों के अनुरूप बनाएं योजनाएं

अध्यक्ष नीरज के. पवन ने बैठक में मौजूद सभी नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपनी विभागीय योजनाओं और गतिविधियों को राज्य युवा नीति के लक्ष्यों के साथ अलाइन (Sanrekhit) करें। उन्होंने युवाओं की डिजिटल पहुंच को मजबूत करने और उद्यमिता के लिए एक अनुकूल इकोसिस्टम तैयार करने पर विशेष बल दिया।

ये अधिकारी रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण बैठक में राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद की सचिव नीतू बारूपाल, युवा मामले एवं खेल विभाग के उप शासन सचिव विक्रम गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा वन एवं पर्यावरण, आयुर्वेद, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, शिक्षा, कला-संस्कृति, कौशल नियोजन, सामाजिक न्याय, सूचना प्रौद्योगिकी (DOIT) और महिला अधिकारिता विभाग के नोडल अधिकारियों ने भी चर्चा में भाग लिया।

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