जयपुर: राजधानी जयपुर के प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगाने वाले तीन प्रमुख बांध—कानोता, चंदलाई और नेवटा—अब जल्द ही प्रदूषण के दाग से मुक्त होंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर इन बांधों के पानी को शुद्ध करने और यहां पर्यटन की संभावनाएं तलाशने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार से अधिकृत विशेषज्ञों की एक विशेष टीम (Agency) इन तीनों बांधों पर विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन कर रही है, जिसकी रिपोर्ट (DPR) जल्द ही राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। इस कवायद का उद्देश्य न केवल जल की गुणवत्ता सुधारना है, बल्कि जयपुर को नए टूरिज्म डेस्टिनेशन देना भी है।


साइंटिफिक स्टडी: कहां से आ रहा है गंदा पानी?
विशेषज्ञों की टीम इन बांधों पर गहन रिसर्च कर रही है। अध्ययन में यह पता लगाया जाएगा कि बांधों में प्रदूषण के स्रोत क्या हैं, गंदा पानी कहां से और कितनी मात्रा में आ रहा है। इसके साथ ही जीआईएस (GIS) आधारित मानचित्रण, जैव विविधता संरक्षण और जल उपचार (Water Treatment) की आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया जाएगा कि गंदे पानी के निकास के वैकल्पिक रास्ते क्या हो सकते हैं, ताकि बांध का मूल स्वरूप बचा रहे।
पर्यटन का ब्लूप्रिंट: बोटिंग और डे-नाइट टूरिज्म
सिर्फ पानी की सफाई ही नहीं, बल्कि सरकार का प्लान इन जगहों को पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करने का है। एजेंसी की रिपोर्ट में पर्यटन विकास की दीर्घकालीन रूपरेखा शामिल होगी। इसमें बांधों में बोटिंग सुविधा शुरू करने, आसपास ग्रीन लैंड विकसित करने और ‘डे-नाइट टूरिज्म’ (Day/Night Tourism) को प्रोत्साहन देने जैसे प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में सिंचाई के लिए बांधों से खेतों तक पानी पहुंचाने की मशीनरी और जल प्रबंधन प्रणाली का भी पूरा खाका खींचा जाएगा।
‘वंदे गंगा’ से मिली प्रेरणा जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ‘वंदे गंगा’ जल संरक्षण जन अभियान के तहत पहले रामगढ़ बांध की सफाई का काम शुरू किया गया था, जिसमें जनता की भारी भागीदारी रही। उसी तर्ज पर अब इन तीन बांधों का कायाकल्प किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि ये प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ जल स्रोत सुनिश्चित करेंगे और स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर खोलेंगे।
