राजस्थान की राजधानी जयपुर, जिसे दुनिया भर में ‘गुलाबी नगरी’ (Pink City) के नाम से जाना जाता है, केवल एक शहर नहीं बल्कि इतिहास का एक जीवंत दस्तावेज है। राजसी किलों, भव्य महलों और रंग-बिरंगे बाजारों से सजा यह शहर अपनी मेहमाननवाजी के लिए प्रसिद्ध है।
आइए, जानते हैं जयपुर के बारे में 10 ऐसे रोचक और विस्तृत तथ्य, जो इस शहर को दुनिया में सबसे खास बनाते हैं:
1. गुलाबी शहर (The Pink City) का असली इतिहास
जयपुर को ‘पिंक सिटी’ कहा जाता है, लेकिन यह हमेशा से गुलाबी नहीं था। 1876 में जब प्रिंस ऑफ वेल्स (बाद में किंग एडवर्ड सप्तम) जयपुर आने वाले थे, तब तत्कालीन महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने मेहमाननवाजी और स्वागत के प्रतीक के रूप में पूरे शहर को गेरूए (Terracotta Pink) रंग में रंगने का आदेश दिया था। आज भी शहर के पुराने हिस्से (चारदीवारी) में कानूनन इमारतों को इसी रंग में रंगा जाना अनिवार्य है।
2. भारत का पहला योजनाबद्ध शहर (UNESCO World Heritage)
जयपुर भारत का पहला ‘प्लान्ड सिटी’ (Planned City) है। इसकी स्थापना 1727 में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने की थी। इसे महान वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य ने ‘वास्तु शास्त्र’ और ‘शिल्प शास्त्र’ के सिद्धांतों के आधार पर डिजाइन किया था। इसकी ग्रिड प्रणाली (सड़कों का समकोण पर काटना) उस समय के लिए एक इंजीनियरिंग चमत्कार थी। 2019 में इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।
3. हवा महल: भगवान कृष्ण का मुकुट
1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा निर्मित हवा महल जयपुर की पहचान है। इसकी वास्तुकला भगवान कृष्ण के मुकुट के आकार की है।
- रोचक तथ्य: इसमें 953 छोटी खिड़कियाँ (झरोखे) हैं, जिन्हें ‘वेंचुरी इफेक्ट’ (Venturi Effect) के लिए बनाया गया था, जिससे महल में हमेशा ठंडी हवा बहती रहे। इसका मुख्य उद्देश्य शाही महिलाओं को बिना किसी की नजर में आए सड़क के जुलूस और उत्सव देखने की सुविधा देना था। मजे की बात यह है कि 5 मंजिला यह इमारत बिना किसी नींव के बनी है।
4. आमेर का किला और शीश महल
जयपुर से 11 किमी दूर स्थित आमेर का किला (Amber Fort) राजपूत और मुगल वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। इसे राजा मान सिंह प्रथम ने बनवाया था। इसका मुख्य आकर्षण ‘शीश महल’ (Mirror Palace) है, जिसकी दीवारों और छत पर हजारों छोटे-छोटे दर्पण जड़े हैं। कहा जाता है कि केवल एक मोमबत्ती जलाने से पूरा हॉल तारों भरे आसमान जैसा चमक उठता है।
5. जंतर-मंतर: समय का सटीक पहरेदार
महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित जंतर-मंतर में दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की धूपघड़ी, ‘वृहत् सम्राट यंत्र’ स्थित है। यह केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि एक खगोलीय वेधशाला है। इसकी सटीकता इतनी अद्भुत है कि यह स्थानीय समय को मात्र 2 सेकंड के अंतर के साथ बता सकती है।
6. जल महल: पानी के भीतर का रहस्य
मान सागर झील के बीचों-बीच स्थित जल महल स्थापत्य कला का एक अजूबा है। पांच मंजिला इस महल की चार मंजिलें पानी के भीतर डूबी रहती हैं, जबकि केवल पांचवीं मंजिल ही दिखाई देती है। इसे 18वीं शताब्दी में महाराजा जय सिंह द्वितीय ने रानियों और राजाओं के लिए ‘डक हंटिंग’ (बत्तख शिकार) लॉज के रूप में पुनर्निर्मित किया था।
7. लस्सी का जायका: मिट्टी की सौंधी खुशबू
अगर आप जयपुर आएं और यहाँ की लस्सी न पिएं, तो यात्रा अधूरी है। यहाँ (विशेषकर एम.आई. रोड पर) मिलने वाली लस्सी अपनी मलाईदार परत और गाढ़ेपन के लिए प्रसिद्ध है। इसे पारंपरिक कुल्हड़ (मिट्टी के बर्तन) में परोसा जाता है, जो इसके स्वाद को और बढ़ा देता है और गर्मी में ठंडक देता है।
8. ज्वैलरी का वैश्विक केंद्र
जयपुर दुनिया भर में अपने कुंदन-मीनाकारी (Kundan-Meenakari) आभूषणों और रत्नों (Gemstones) की कटिंग और पॉलिशिंग के लिए प्रसिद्ध है। शहर का ‘जौहरी बाजार’ सोने, चांदी और कीमती पत्थरों के आभूषणों का खजाना है। यहाँ के कारीगरों की हस्तकला पीढ़ियों पुरानी है।
9. हाथी महोत्सव (Elephant Festival)
होली के अवसर पर जयपुर में आयोजित होने वाला हाथी महोत्सव एक प्रमुख आकर्षण रहा है। इसमें हाथियों को मखमली झूलों और आभूषणों से सजाया जाता है। हाथियों की दौड़, पोलो मैच और ‘रस्साकशी’ (हाथी बनाम इंसान) जैसे खेल पर्यटकों को रोमांचित करते हैं। (नोट: पशु कल्याण के नियमों के कारण हाल के वर्षों में इसके स्वरूप में कुछ बदलाव आए हैं, लेकिन ‘हाथी गाँव’ में पर्यटक अब भी हाथियों के साथ समय बिता सकते हैं)।
10. कठपुतली कला (Puppetry)
रंगीन कठपुतली (Kathputli) नृत्य राजस्थान की सबसे पुरानी लोक कलाओं में से एक है। जयपुर के कलाकार लकड़ी और कपड़े से बनी इन गुड़ियों के माध्यम से राजा-महाराजाओं की शौर्य गाथाएं और सामाजिक संदेश सुनाते हैं। यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक प्राचीन किस्सागोई (Storytelling) की परंपरा है।
