नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया (Checking Process) में ऐतिहासिक बदलाव किया है। इस साल से ‘ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम’ (Onscreen Marking System) लागू किया जा रहा है। इसका सीधा असर कॉपियों की जांच की गुणवत्ता और रिजल्ट की सटीकता पर पड़ेगा। परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने नई व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
क्या है ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम?
अब तक शिक्षक फिजिकल कॉपियां जांचते थे, लेकिन अब:
- छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं (Answer Sheets) को स्कैन किया जाएगा।
- इसमें लिखे हुए पेजों के साथ-साथ खाली पेज भी स्कैन होंगे।
- सभी कॉपियां केंद्रीय स्तर पर रीजनल सेंटर्स में स्कैन होकर सेंट्रल सर्वर पर अपलोड होंगी।
- शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपियां जांचेंगे।
बिना जांचे कॉपी सबमिट नहीं होगी
नया सॉफ्टवेयर इतना स्मार्ट है कि अगर परीक्षक (Examiner) ने किसी पेज को बिना देखे या बिना मार्क किए आगे बढ़ा दिया, तो सिस्टम उसे रिमाइंडर देगा।
- खाली पेज: यदि कोई पेज खाली है, तो शिक्षक को वहां डिजिटल रूप से ‘ब्लैंक पेज’ मार्क करना होगा।
- नॉट अटेम्प्टेड (NA): यदि छात्र ने किसी सवाल का जवाब नहीं दिया, तो मार्किंग टेबल में उस सवाल के आगे ‘NA’ लिखना अनिवार्य होगा। तभी कॉपी सबमिट होगी।
छात्रों के लिए खुशखबरी: ‘Best of Two’ का फायदा
अक्सर छात्र असमंजस में रहते हैं कि ‘अथवा’ (OR) वाले सवालों में से कौन सा करें। नई व्यवस्था में छात्रों को बड़ी राहत दी गई है:
- नियम: अगर किसी छात्र ने ‘अथवा’ (Option) वाले दोनों प्रश्नों को हल कर दिया है, तो शिक्षक को दोनों को जांचना होगा।
- फायदा: दोनों उत्तरों में से जिस उत्तर पर ज्यादा अंक होंगे, फाइनल टोटल में वही अंक जोड़े जाएंगे।
स्कूलों को चेतावनी: हिस्सा नहीं लिया तो रुकेगा रिजल्ट
बोर्ड ने स्कूलों के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया में भाग लेना अनिवार्य कर दिया है।
- यदि कोई स्कूल अपने शिक्षकों को कॉपी चेकिंग के लिए नहीं भेजता है, तो उस स्कूल के छात्रों का रिजल्ट रोक दिया जाएगा।
- उदाहरण के लिए, यदि किसी स्कूल के 500 छात्र परीक्षा दे रहे हैं, तो उस स्कूल के शिक्षकों को सामूहिक रूप से 500 कॉपियां जांचने की जिम्मेदारी उठानी होगी।
महत्वपूर्ण आंकड़े और सुरक्षा
- कुल छात्र: 18,59,479
- कुल कॉपियां: 1 करोड़ से अधिक (1,00,44,295)
- मूल्यांकन शुरू: 26 फरवरी से संभावित।
- सुरक्षा: शिक्षक घर से कॉपी नहीं जांच सकेंगे। यह केवल स्कूल परिसर में रजिस्टर्ड आईपी एड्रेस वाले कंप्यूटर पर ही संभव होगा।
