नई दिल्ली: अगर आपके दरवाजे पर जनगणना (Census) करने कोई सरकारी कर्मचारी आए, तो सावधान रहें और जानकारी बिल्कुल सही दें। केंद्र सरकार देश में पहली बार डिजिटल जनगणना (Digital Census) कराने जा रही है और इस बार नियम बेहद सख्त हैं। गलत जानकारी देने या जानकारी देने से मना करने पर आपको 3 साल तक की जेल या भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा पहला चरण
खबर के मुताबिक, जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी।
- पहला चरण: 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच देश के अलग-अलग राज्यों में चलेगा।
- तैयारी: हर 1000 लोगों की आबादी पर एक प्रगणक (Enumerator/सरकारी कर्मचारी) तैनात किया जाएगा।
गलत जानकारी देने पर सख्त सजा का प्रावधान
अक्सर लोग सरकारी सर्वे में जानकारी छिपाते हैं या गलत बताते हैं, लेकिन इस बार ऐसा करना भारी पड़ेगा।
- अनिवार्य भागीदारी: जनगणना अधिनियम 1948 और नियम 1990 की धारा-11 (1-11) के तहत, हर नागरिक के लिए सही जानकारी देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- सजा: यदि कोई व्यक्ति जानकारी देने से इनकार करता है या जानबूझकर गलत सूचना देता है, तो उसे 3 साल की कैद या 1000 रुपये का जुर्माना (या दोनों) हो सकती है।
कैसे होगी ‘डिजिटल जनगणना’?
यह भारत के इतिहास में पहली बार है जब डेटा कलेक्शन पूरी तरह डिजिटल होगा।
- मोबाइल ऐप: प्रगणक (कर्मचारी) आपके घर आएंगे और मोबाइल ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा करेंगे।
- ऑफलाइन/ऑनलाइन: यह डेटा ऑफलाइन भी कलेक्ट किया जाएगा और ऐप के माध्यम से रियल टाइम में सर्वर पर अपलोड होगा।
- पहचान: आपके घर आने वाले कर्मचारी की पहचान के लिए संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार द्वारा जारी एक आईडी कार्ड (ID Card) उनके पास होगा। आप जानकारी देने से पहले इसे चेक कर सकते हैं।
पूछे जाएंगे 33 सवाल
इस सर्वे में आपसे मकान और सुविधाओं से जुड़े 33 तरह के सवाल पूछे जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- मकान पक्का है या कच्चा?
- पानी, बिजली और शौचालय की सुविधा है या नहीं?
- परिवार के सदस्यों की संख्या और अन्य बुनियादी जानकारियां।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि आपसे ली गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और इसे किसी भी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं किया जाएगा।
