गृह मंत्रालय का आदेश: राष्ट्रगान से पहले अब गाना होगा पूरा ‘वंदे मातरम्’, जानें नए नियम

देश के स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नई और अहम गाइडलाइन जारी की है। 28 जनवरी के आदेश के तहत जारी इन दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब राष्ट्रगान (जन गण मन) से ठीक पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। खास बात यह है कि अब इसका संक्षिप्त रूप नहीं, बल्कि पूरे 6 अंतरे गाने होंगे।

3 मिनट 10 सेकंड तक गूंजेगा राष्ट्रगीत

नई गाइडलाइन के अनुसार, जब भी किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान दोनों का आयोजन हो, तो वरीयता ‘वंदे मातरम्’ को दी जाएगी।

  • तय समय: राष्ट्रगीत के सभी छह अंतरे गाने में कुल 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगेगा।
  • राष्ट्रगान: इसके ठीक बाद 52 सेकंड की अवधि वाला राष्ट्रगान गाया जाएगा।
  • सावधान की मुद्रा: राष्ट्रगीत के दौरान सभी लोगों को ‘सावधान’ की मुद्रा में खड़े रहना अनिवार्य होगा। जरूरत पड़ने पर गीत के प्रिंट आउट भी बांटे जा सकते हैं ताकि लोग सही उच्चारण के साथ गा सकें।

स्कूलों के लिए निर्देश: दिन की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ से

सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों के लिए विशेष निर्देश दिए हैं। स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक गायन से होगी। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रों के मन में इसके प्रति सम्मान की भावना विकसित हो।

खड़े न होने की छूट कब?

गाइडलाइन में एक विशेष परिस्थिति में खड़े न होने की छूट भी दी गई है। यदि किसी डॉक्यूमेंट्री या फिल्म के हिस्से के रूप में ‘वंदे मातरम्’ बजाया जा रहा है, तो दर्शकों को खड़ा होना जरूरी नहीं है, क्योंकि इससे फिल्म की प्रस्तुति में बाधा आ सकती है।

नियम नहीं माना तो क्या होगी सजा?

फिलहाल, गृह मंत्रालय की गाइडलाइन में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति इसे नहीं गाता है, तो अभी तक इसके लिए किसी भी तरह के दंड या कानूनी कार्यवाही का प्रावधान नहीं किया गया है।


इतिहास के झरोखे से: क्यों खास है ‘वंदे मातरम्’

  • रचना: 1870 के दशक में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसकी रचना की थी। इसकी मूल धुन रवींद्रनाथ टैगोर ने तैयार की थी, लेकिन आज जो धुन प्रचलित है, उसे यदुनाथ भट्टाचार्य ने बनाया था।
  • राष्ट्रीय दर्जा: 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे ‘राष्ट्रीय गीत’ का दर्जा दिया था। प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि इस गीत को राष्ट्रगान के समान ही सम्मान दिया जाएगा।
  • आजादी का रणघोष: 1905 के बंगाल विभाजन के दौरान यह गीत ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बन गया था। स्वतंत्रता सेनानी लाठियां खाते और फांसी पर झूलते वक्त इसी गीत को गाते थे।
  • विश्व स्तर पर ख्याति: साल 2002 में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे में ‘वंदे मातरम्’ को दुनिया का दूसरा सबसे लोकप्रिय गीत चुना गया था।

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