जयपुर में दिखा ‘लघु भारत’: यूपी, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर का स्थापना दिवस धूमधाम से मना; राज्यपाल बोले- विविधता ही हमारी असली शक्ति

जयपुर – लोकभवन में शनिवार को ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की मूल भावना जीवंत हो उठी। यहां उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर राज्यों का स्थापना दिवस पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने राजस्थान में निवास कर रहे इन चारों राज्यों के लोगों को बधाई दी और उनसे राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद डॉ. दिनेश शर्मा भी मौजूद रहे, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।

विविधता ही देश की असली शक्ति

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री बागडे ने कहा कि भारत की असली पहचान उसकी ‘विविधता में एकता’ है और राज्यों का स्थापना दिवस मनाना इसी संस्कृति को उत्सव के रूप में जीने का प्रयास है। उन्होंने उत्तर प्रदेश को ‘भारत का भाल’ बताते हुए कहा कि अयोध्या का भव्य राम मंदिर और प्रयागराज का ऐतिहासिक कुंभ मेला न केवल यूपी, बल्कि पूरे विश्व के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। इसके साथ ही, राज्यपाल ने पूर्वोत्तर के राज्यों—मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा—की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और प्रकृति प्रेम को देश की धरोहर बताया।

यूपी और राजस्थान का गहरा नाता

सांसद और यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि यूपी आज केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आर्थिक और राजनीतिक रूप से एक सशक्त राज्य बनकर उभरा है। उन्होंने राजस्थान और उत्तर प्रदेश के गहरे संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजस्थान में सबसे ज्यादा यूपी के लोग रहते हैं और यूपी में राजस्थानियों की बड़ी तादाद है। यह दोनों पड़ोसी राज्य एक-दूसरे के विकास के सच्चे साथी हैं।

संवाद से साझा किए अनुभव

कार्यक्रम के अंत में एक आत्मीय संवाद सत्र का आयोजन भी हुआ, जिसमें राज्यपाल ने चारों राज्यों के निवासियों से सीधे बातचीत की। यहां मौजूद लोगों ने राजस्थान में अपने अनुभवों को साझा किया और अपनी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल एक औपचारिक समारोह था, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के मिलन का एक सुंदर उदाहरण भी साबित हुआ।

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