नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के प्रशासनिक ढांचे को और सुदृढ़ करते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया। प्रधानमंत्री ने दिल्ली में अत्याधुनिक ‘सेवा तीर्थ’ नाम से बने नए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भवन के साथ-साथ ‘कर्तव्य भवन-1’ और ‘कर्तव्य भवन-2’ का भव्य उद्घाटन किया। यह नया परिसर भारत के शासन-प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु बनेगा।
एक परिसर, तीन महत्वपूर्ण संस्थान

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश के तीन सबसे महत्वपूर्ण कार्यकारी अंगों को एक ही स्थान पर एकीकृत करना है। ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में अब:
- प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
- राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (National Security Council Secretariat – NSCS)
- कैबिनेट सचिवालय (Cabinet Secretariat)
ये तीनों महत्वपूर्ण संस्थान एक ही छत के नीचे आ जाएंगे। यह एकीकरण निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और समग्र दक्षता में सुधार करने में सहायक होगा।
आधुनिकता और दक्षता का प्रतीक ‘सेवा तीर्थ’

नए PMO भवन, जिसे ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है, में अत्याधुनिक सुविधाएं और नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह भवन आधुनिक कार्यप्रणाली और संचार प्रणालियों से सुसज्जित है, जो प्रधानमंत्री और उनके दल को देश के शासन को और अधिक प्रभावी ढंग से चलाने में मदद करेगा।
‘कर्तव्य भवन-1’ और ‘कर्तव्य भवन-2’ भी उच्च दक्षता वाले कार्यस्थलों के रूप में डिज़ाइन किए गए हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय के कर्मचारियों के लिए एक सहज और सहयोगी वातावरण प्रदान करेंगे।
‘कर्तव्य पथ’ के बाद ‘कर्तव्य भवन’

यह उद्घाटन ‘कर्तव्य पथ’ (पूर्व में राजपथ) के पुनर्विकास के बाद हुआ है, जो सरकार की ‘सेंट्रल विस्टा’ परियोजना का एक हिस्सा है। ‘कर्तव्य’ शब्द राष्ट्र सेवा और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण को दर्शाता है, जो इन नए भवनों के नामकरण में परिलक्षित होता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि यह परिसर भारत के अमृत काल के लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश के विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एक छत के नीचे इन प्रमुख संस्थाओं के आने से न केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त और एकीकृत दृष्टिकोण को भी बढ़ावा देगा।
