जयपुर: ‘रेडियोएक्टिव प्लेट’ के नाम पर 26 करोड़ की ठगी, 7 साल से फरार दो इनामी भाई सिलीगुड़ी से गिरफ्तार

जयपुर पश्चिम पुलिस ने एक ऐसे हाई-प्रोफाइल अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने ‘रेडियोएक्टिव प्लेट’ और दुर्लभ वस्तुओं के नाम पर देशभर के व्यवसायियों से करोड़ों रुपये ठग लिए। पुलिस ने 2019 से फरार चल रहे दो इनामी आरोपियों को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से गिरफ्तार किया है, जिन पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

5 करोड़ की ठगी ने खोली पोल इस मामले की परतें तब खुलीं जब हैदराबाद के एक व्यवसायी नंदकिशोर ने 5.05 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई। गिरोह ने नंदकिशोर को झांसा दिया था कि उनके पास एक बेशकीमती ‘रेडियोएक्टिव प्लेट’ है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने DRDO, BARC और NASA जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के फर्जी दस्तावेज और टेस्टिंग रिपोर्ट दिखाईं। जब मुनाफा नहीं मिला, तो पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ।

सिलीगुड़ी से हुई गिरफ्तारी जयपुर पश्चिम पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों की सूचना पर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में दबिश दी। वहां से दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया गया:

  1. विनय उर्फ विनय पंवार (अग्रवाल): मूल निवासी श्यामनगर अपार्टमेंट, बनिपार्क, जयपुर।
  2. विकास उर्फ विकास पंवार (अग्रवाल): मूल निवासी श्यामनगर अपार्टमेंट, बनिपार्क, जयपुर। ये दोनों आरोपी 2019 से फरार थे और कोर्ट ने इन्हें 299 सीआरपीसी के तहत भगोड़ा घोषित किया था।

ठगी का अनोखा तरीका: ‘केमिकल टेस्ट’ का नाटक गिरोह ने Sipri, Rencel Elecken Fonvy और B.M.W. Precious Metal Trade Linker जैसी फर्जी कंपनियां बना रखी थीं। ये लोग जयपुर और मुंबई में आलीशान ऑफिस खोलकर खुद को बड़ा कारोबारी बताते थे।

  • सामान: ये लोग रेडियोएक्टिव प्लेट, आर्टिकल-192, जादुई चश्मा, दुर्लभ पेंटिंग और सुलेमानी माला जैसे उत्पादों का सौदा करते थे।
  • टेस्टिंग का खेल: शिकार को आगरा रोड स्थित एक फार्म हाउस पर ले जाया जाता था, जहां भारी फीस लेकर ‘केमिकल टेस्टिंग’ का ड्रामा होता था। पहली बार में टेस्ट जानबूझकर फेल बताया जाता और री-टेस्ट के नाम पर और पैसे वसूले जाते थे।

अखबार के विज्ञापन से आया था ठगी का आइडिया पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरे खेल की शुरुआत एक हिंदी अखबार के विज्ञापन से हुई थी, जिसमें 25 मिलियन डॉलर प्रति ग्राम वाली रेडियोधर्मी धातु का जिक्र था। इसे देखकर सफाई कर्मचारी सुपरवाइजर रहे सत्यनारायण अनोरिया और खुद को होम्योपैथ बताने वाले दिनेश आर्य ने ठगी का यह प्लान बनाया।

देशभर के कारोबारी बने शिकार पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, इस गिरोह ने अब तक करीब 26 करोड़ रुपये की ठगी की है। प्रमुख शिकार बने लोगों की सूची इस प्रकार है:

  • अजय कुमार जैन (दिल्ली): 8 करोड़ रुपये
  • नंदकिशोर (हैदराबाद): 5.55 करोड़ रुपये
  • नावेद हसन (इंदौर): 4.80 करोड़ रुपये
  • दिलीप अग्रवाल (कोलकाता): 3.09 करोड़ रुपये
  • गोपाल लाल शर्मा (सवाई माधोपुर): 1.25 करोड़ रुपये
  • रवींद्र फतह पुरिया (जयपुर): 25 लाख रुपये

पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और मनी ट्रेल की जांच कर रही है। जयपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे रेडियोएक्टिव या जादुई वस्तुओं में निवेश के लुभावने प्रस्तावों से सावधान रहें और दस्तावेजों की सरकारी स्तर पर जांच जरूर कराएं।

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