जयपुर। राजस्थान में एक तरफ आम आदमी पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए रोज संघर्ष कर रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार चकाचौंध के नाम पर खजाना लुटा रही है। जनता की गाढ़ी कमाई आखिर कहाँ गायब हो रही है? ‘LIVE सच’ के हाथ लगे कुछ बेहद गोपनीय सरकारी दस्तावेज़ों ने एक ऐसे ‘फिल्मी तमाशे’ की पोल खोली है, जिसकी हकीकत जानकर आपके होश उड़ जाएंगे। यह मामला करोड़ों की उस बर्बादी का है, जिसे ‘ब्रांडिंग’ का नाम दिया गया।

दस्तावेजों ने खोली पोल: 60 करोड़ का भुगतान
‘LIVE सच’ के हाथ लगे आधिकारिक दस्तावेज़ों ने आईफा (IIFA) 2025 के नाम पर हुए भारी-भरकम और संदिग्ध खर्च का पर्दाफाश कर दिया है। दस्तावेजों से साफ होता है कि सरकार ने इस आयोजन के लिए खजाना खोल दिया था।
दस्तावेजों के मुताबिक, अकेले पर्यटन विभाग ने इस दो दिवसीय निजी आयोजन के लिए सरकारी खजाने से कुल ₹59,95,05,737 (लगभग 60 करोड़ रुपये) का भुगतान किया है। यह रकम सीधे जनता की जेब से गई है।
कहाँ खप गई आपकी गाढ़ी कमाई?
पर्यटन विभाग द्वारा प्रस्तुत विवरण यह बताने के लिए काफी है कि किस तरह ‘ब्रांड प्रमोशन’ की आड़ में सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। हमने जब आंकड़ों की गहराई से जांच की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा, यानी ₹59,00,00,000 (59 करोड़ रुपये), सीधे तौर पर ‘ब्रांड प्रमोशन फीस’ और ‘स्टेट गवर्नमेंट सपोर्ट’ के नाम पर आयोजकों को दे दिया गया। यह एक मुश्त राशि बिना किसी ठोस सवाल के दी गई।
नाच-गाने और दिखावे पर लाखों लुटाए
सिर्फ 59 करोड़ की फीस ही नहीं, इसके अलावा भी पैसे पानी की तरह बहाए गए। 8-9 मार्च 2025 को मुख्य अवॉर्ड सेरेमनी के दौरान हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नाच-गाने पर ₹87,24,525 का बिल फाड़ा गया।
हद तो तब हो गई जब सिर्फ एक प्रेस मीट के दौरान हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर ही ₹3,17,472 लुटा दिए गए। इतना ही नहीं, आईफा प्रमोशन और लाइफ साइज ग्राफिक्स निर्माण जैसी दिखावे की चीजों पर ₹4,63,740 फूंक दिए गए।

‘LIVE सच’ के तीखे सवाल: आखिर जरूरत क्या थी?
यह भारी-भरकम फिजूलखर्ची कई गंभीर सवाल खड़े करती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसकी जरूरत क्या थी? राजस्थान पहले से ही एक विश्व प्रसिद्ध पर्यटन ब्रांड है, जहाँ हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक की शूटिंग नियमित रूप से होती रहती है।
ऐसे में अपनी पहचान बताने के लिए एक निजी अवॉर्ड शो को 60 से 100 करोड़ रुपये देना किसी भी तरह से तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता। क्या यह पैसा विकास कार्यों में नहीं लग सकता था?
किसे मिला मलाई का हिस्सा?
दूसरा बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस आयोजन से फायदा किसे मिला? आयोजन में कई बड़े सितारे नदारद रहे, इसके बावजूद करोड़ों रुपये ‘ब्रांडिंग’ के नाम पर इवेंट कंपनियों की झोली में डाल दिए गए।
वहीं, आम जनता और स्थानीय कलाकारों के हाथ खाली रहे। जहाँ प्रदेश के स्थानीय लोक कलाकारों को नाममात्र का भुगतान मिला, वहीं बाहरी कोरियोग्राफर्स और डिजाइनर्स पर लाखों रुपये खर्च किए गए।
सरकार का तर्क: फिल्म टूरिज्म या महंगा मनोरंजन?
सरकार का तर्क है कि इस आयोजन से प्रदेश में ‘फिल्म टूरिज्म’ को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन ‘LIVE सच’ यह पूछता है कि क्या 60 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश के बाद प्रदेश के पर्यटन राजस्व में उतनी बढ़ोतरी हुई है?
या यह सिर्फ जनता के पैसों पर आयोजित एक महंगा मनोरंजन मात्र था, जिसका बोझ अब प्रदेश की जनता उठा रही है। ‘LIVE सच’ भ्रष्टाचार और सरकारी फिजूलखर्ची के खिलाफ अपनी यह मुहिम जारी रखेगा।
