जयपुर। राजस्थान में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और उनकी अनियंत्रित आबादी को नियंत्रित करने के लिए भजनलाल सरकार ने अब ‘आर-पार’ की रणनीति तैयार कर ली है। सोमवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें कुत्तों के आतंक से निपटने के लिए एक आधुनिक ‘एकीकृत डिजिटल पोर्टल’ (Integrated Portal) विकसित करने का निर्णय लिया गया है।
पोर्टल से रुकेगा ‘नसबंदी का खेल’: पारदर्शिता पर जोर
अक्सर शिकायतें आती हैं कि नगर निकायों द्वारा कागजों में नसबंदी का आंकड़ा तो बड़ा दिखाया जाता है, लेकिन धरातल पर कुत्तों की संख्या कम नहीं होती। अब इस पोर्टल के माध्यम से:
- वार्ड वार डेटा: हर गली और मोहल्ले में कितने कुत्ते हैं, इसका सटीक डेटा पोर्टल पर होगा।
- फोटो और लोकेशन: नसबंदी (ABC) और टीकाकरण के बाद कुत्ते की फोटो और लोकेशन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
- जवाबदेही: राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति सीधे इस पोर्टल के जरिए अधिकारियों की प्रगति की जांच करेगी।
नए ‘एनीमल बर्थ कंट्रोल’ (ABC) सेंटरों का जाल

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के उन हॉटस्पॉट्स की पहचान की जाए जहाँ कुत्तों के काटने की घटनाएं सबसे ज्यादा हैं। ऐसे इलाकों में प्राथमिकता के साथ नए एबीसी सेंटर खोले जाएंगे। साथ ही, पशु कल्याण संगठनों (NGOs) के साथ मिलकर इस अभियान को युद्ध स्तर पर चलाया जाएगा।
प्रशासनिक ढांचा और निगरानी
कुत्तों के प्रबंधन के लिए सरकार ने त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र बनाया है:
- राज्य स्तर: राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति नीतिगत निर्णय और प्रगति की समीक्षा करेगी।
- जिला स्तर: जिला कलेक्टरों को हर महीने अनिवार्य रूप से बैठक कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
- स्थानीय स्तर: जयपुर में कलेक्टर जितेन्द्र सोनी और नगर निगम आयुक्त को इस मॉडल को सबसे पहले प्रभावी रूप से लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जनता की भागीदारी और जागरूकता
सरकार का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक कार्य नहीं है। इसके लिए सोशल मीडिया के जरिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। लोग पोर्टल के माध्यम से अपने क्षेत्र के हिंसक कुत्तों की सूचना दे सकेंगे और टीकाकरण की स्थिति जान सकेंगे।
