होली के त्योहार का उत्साह संपन्न होने के बाद अब श्रद्धालु चैत्र नवरात्रि की तैयारियों में जुट गए हैं। पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च 2026, गुरुवार से होने जा रही है। यह दिन न केवल मां दुर्गा की आराधना का आरंभ है, बल्कि इसी दिन से हिंदू नववर्ष यानी विक्रम संवत 2083 का भी शुभारंभ होगा। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व उत्तर भारत के राज्यों में विशेष आस्था का केंद्र रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रतिपदा तिथि (जिसे ‘पड़वा’ या ‘एकम’ भी कहा जाता है) 18 मार्च की रात 09:34 बजे से शुरू होकर 19 मार्च की रात 10:15 बजे तक रहेगी।
घटस्थापना का सटीक समय: सुबह और दोपहर के मुहूर्त की जानकारी
नवरात्रि के पहले दिन ‘घटस्थापना’ (कलश स्थापना) का सबसे अधिक महत्व होता है, जिसे शक्ति की देवी मां दुर्गा का अपने घर में आह्वान माना जाता है। पंचांग के अनुसार, 19 मार्च को घटस्थापना के लिए दो प्रमुख मुहूर्त उपलब्ध होंगे। पहला मुहूर्त प्रातः काल 06:11 बजे से 08:35 बजे तक रहेगा। यदि किसी कारणवश आप सुबह स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो दोपहर में 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहने वाला ‘अभिजीत मुहूर्त’ सबसे उत्तम और श्रेष्ठ माना जाता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि घटस्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए और चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग के समय स्थापना से बचना चाहिए।
पालकी पर होगा माता का आगमन, हाथी पर होगी विदाई
इस बार की नवरात्रि विशेष होने वाली है क्योंकि मां दुर्गा अपने भक्तों से मिलने पालकी (डोली) पर सवार होकर आ रही हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब नवरात्रि गुरुवार के दिन शुरू होती है, तो माता का वाहन पालकी होता है। पालकी पर माता का आगमन शुभता के साथ-साथ भक्तों को थोड़ा धैर्य और सावधानी बरतने का संकेत भी देता है। वहीं, नौ दिनों की पूजा के बाद माता की विदाई हाथी पर होगी। देवी भागवत पुराण के अनुसार, हाथी की विदाई को भारी वर्षा, सुख-समृद्धि और कृषि के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
क्या है कलश स्थापना का महत्व और पूजा के नियम?
घटस्थापना केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक मानकर उसमें समस्त देवी-देवताओं को स्थापित करने की विधि है। चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। 19 फरवरी से शुरू हुआ फाल्गुन मास 21 मार्च को समाप्त होगा, जिसके बाद चैत्र का महीना भक्तिमय हो जाएगा। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि पूजा के दौरान शुद्धता का ध्यान रखें और घटस्थापना के लिए सही दिशा और मुहूर्त का चुनाव करें ताकि माता की कृपा और शुभ फलों की प्राप्ति हो सके।
चैत्र नवरात्रि 2026: मुहूर्त एट ए ग्लांस (Table)
| विशेष विवरण | तिथि एवं समय |
| नवरात्रि प्रारंभ | 19 मार्च 2026, गुरुवार |
| प्रतिपदा तिथि आरंभ | 18 मार्च, रात 09:34 बजे |
| प्रतिपदा तिथि समाप्त | 19 मार्च, रात 10:15 बजे |
| घटस्थापना (सुबह) | 06:11 AM से 08:35 AM |
| अभिजीत मुहूर्त (श्रेष्ठ) | 12:05 PM से 12:53 PM |
| माता की सवारी (आगमन) | पालकी (डोली) |
| माता की सवारी (विदाई) | हाथी |
