झुंझुनूं, राजस्थान: समाज में समानता, सम्मान और सौहार्द की भावना को जीवंत करते हुए, झुंझुनूं के बाबल परिवार ने अपने भतीजे के विवाह समारोह को एक प्रेरणादायक सामाजिक समरसता मंच में बदल दिया। जाट समुदाय से संबंध रखने वाले राजेश बाबल और पूजा बाबल के परिवार द्वारा आयोजित इस विवाह में, परंपराओं से आगे बढ़ते हुए ऐसे कदम उठाए गए जिनकी हर ओर सराहना हो रही है।
अतिथि सत्कार: अग्रिम पंक्तियों में मिला सम्मान
जिला प्रचार प्रमुख सुभाष प्रजापत ने बताया कि इस समारोह में वर्षों से घर और कार्यालय में सहयोग देने वाले कर्मचारियों, विशेष रूप से वाल्मीकि समाज की महिलाओं और उनके परिजनों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।
- समानता का प्रतीक: सिर्फ आमंत्रण ही नहीं, बल्कि उन्हें विवाह मंडप की अग्रिम पंक्तियों (front rows) में बैठाया गया, ताकि उन्हें भी समारोह के हर पल में सहभागिता और सम्मान का अनुभव हो। यह सामाजिक भेदभाव को मिटाकर सभी को एक समान दर्जा देने का स्पष्ट संदेश था।
- विनम्र सेवा: सबसे दिल को छू लेने वाली बात यह रही कि बाबल परिवार के सदस्यों ने स्वयं आगे बढ़कर इन अतिथियों की अगवानी की और उन्हें अपने हाथों से भोजन परोसा। यह विनम्रता और सादगी से भरा व्यवहार वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति के मन को छू गया।
सामाजिक सौहार्द और सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा
समारोह में आए मेहमानों ने बाबल परिवार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह न सिर्फ सामाजिक सौहार्द को मजबूत करता है, बल्कि यह उदाहरण समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की शक्ति भी रखता है। बाबल परिवार ने यह साबित किया कि रिश्तों और समारोहों की खूबसूरती तभी बढ़ती है जब हर वर्ग को साथ लेकर चला जाए।
पर्यावरण संरक्षण की मिसाल
इस आयोजन में केवल सामाजिक समरसता ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
- सिंगल-यूज प्लास्टिक मुक्त: पूरे विवाह समारोह में सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया, जिससे यह कार्यक्रम न केवल सामाजिक बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी सराहनीय बन गया।
बाबल परिवार की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है कि वास्तविक उत्सव वही है, जिसमें समरसता, सम्मान और मानवता की रोशनी सबसे अधिक चमके। यह आयोजन समाज को एकजुटता और समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।

