जयपुर/भरतपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही ‘जीरो टॉलरेंस’ मुहिम के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भरतपुर में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसीबी ने शिक्षा विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण महकमे ‘समग्र शिक्षा अभियान’ (Samagra Shiksha Abhiyan) के कार्यालय में छापा मारकर दो कनिष्ठ अभियंताओं (JEN) को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। दोनों आरोपी एक ठेकेदार से उसकी सुरक्षा जमा राशि (Security Deposit – SD) लौटाने की एवज में 23,400 रुपये की घूस ले रहे थे। इस कार्रवाई से सरकारी महकमों, खासकर शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
7.1 प्रतिशत कमीशन का खेल: ऐसे बिछाया जाल
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक गोविन्द गुप्ता ने बताया कि एसीबी चौकी भरतपुर को एक परिवादी ने शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने विभाग में कुछ निर्माण कार्य कराए थे, जिसके बदले उसकी सुरक्षा जमा राशि (SD) विभाग में जमा थी। इस राशि को लौटाने के लिए कार्यालय के चक्कर काटे जा रहे थे।
आरोप है कि एडीपीसी (ADPC) समग्र शिक्षा कार्यालय, भरतपुर में तैनात कनिष्ठ अभियंता (सिविल) धीरेन्द्र श्रीवास्तव और कुम्हेर ब्लॉक के कनिष्ठ अभियंता (संविदा कर्मी) राकेश कुमार गुप्ता द्वारा इस काम के लिए रिश्वत की मांग की जा रही थी। दोनों इंजीनियरों ने परिवादी से कुल एसडी राशि का 7.1 प्रतिशत कमीशन के हिसाब से 23,400 रुपये की मांग की और लगातार दबाव बनाकर उसे परेशान कर रहे थे।

रंगे हाथों गिरफ्तारी: पैसे हाथ में आते ही दबोचा
शिकायत का सत्यापन करने के बाद एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर ट्रैप की योजना बनाई गई। उप महानिरीक्षक पुलिस डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित सिंह (एसीबी भरतपुर) के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाया। तय योजना के अनुसार, जैसे ही आरोपी कनिष्ठ अभियंताओं ने परिवादी से 23,400 रुपये की रिश्वत राशि ली, पहले से मुस्तैद एसीबी टीम ने दोनों को मौके पर ही रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
स्थायी हो या संविदा, भ्रष्टाचार में सब शामिल
इस कार्रवाई ने एक चिंताजनक पहलू भी उजागर किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक स्थायी कर्मचारी (धीरेन्द्र श्रीवास्तव) है, जबकि दूसरा संविदा कर्मी (राकेश कुमार गुप्ता) है। यह स्पष्ट करता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें केवल स्थायी अधिकारियों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि संविदा पर लगे कर्मचारी भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। समग्र शिक्षा जैसे संवेदनशील विभाग में इस तरह की रिश्वतखोरी सामने आने से प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ACB की चेतावनी: बख्शे नहीं जाएंगे भ्रष्टाचारी
एसीबी के महानिरीक्षक पुलिस राजेश सिंह के सुपरविजन में आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है। एसीबी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे का अनुसंधान किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इन्होंने पूर्व में भी अन्य ठेकेदारों से इसी तरह वसूली की है और इस नेटवर्क में विभाग के और कौन-कौन से बड़े अधिकारी शामिल हो सकते हैं।
एसीबी ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने या लेने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी यह मुहिम सख्ती से जारी रहेगी।
