असम विधानसभा में डिजिटल क्रांति: सीएम ने लॉन्च किया AI सिस्टम ‘ALISA’, तकनीकी उद्यमी सुमन शेखर का विजन

गुवाहाटी/दिसपुर। असम विधानसभा ने सोमवार को इतिहास रच दिया। 1937 में शिलांग में अपनी स्थापना से लेकर आज तक के लगभग 90 सालों के विधायी इतिहास को अब ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के जरिए एक क्लिक पर उपलब्ध करा दिया गया है। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा शर्मा और विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी ने देश के अपनी तरह के पहले और सबसे उन्नत सिस्टम ‘ALISA’ (AI for Legislative Intelligence System of Assam) का भव्य उद्घाटन किया।

‘ALISA’ (AI for Legislative Intelligence System of Assam)

इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को हकीकत में बदलने का श्रेय गुरुग्राम (हरियाणा) स्थित तकनीकी उद्यमी सुमन शेखर को जाता है, जिनकी दूरदर्शी सोच और तकनीकी विशेषज्ञता ने असम की पुरानी फाइलों को आधुनिक डिजिटल अवतार दिया।

क्या है ALISA? 5 लाख पन्नों का डिजिटल खजाना

‘ALISA’ केवल एक वेबसाइट नहीं, बल्कि एक इंटेलिजेंट सिस्टम है। इसमें 1937 से अब तक के 5 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज, सदन की कार्यवाही, बहस, बिल और कानूनों को डिजिटल कर दिया गया है।

  • पुरानी फाइलों में जान फूंकी: सिस्टम में अत्याधुनिक OCR तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे धुंधले और क्षतिग्रस्त पुराने रिकॉर्ड्स को भी साफ पढ़ा जा सकता है।
  • RAG तकनीक का कमाल: यह सिस्टम RAG (Retrieval-Augmented Generation) आर्किटेक्चर पर काम करता है, जो यूजर के सवाल पूछते ही सबसे सटीक और संदर्भ-सहित जवाब देता है।

सुमन शेखर का विजन: विरासत को तकनीक से जोड़ा

प्रोजेक्ट के सूत्रधार और तकनीकी उद्यमी सुमन शेखर ने बताया कि यह काम आसान नहीं था। उन्होंने कहा, “ALISA केवल एक सॉफ्टवेयर नहीं है, यह असम की सांस्कृतिक और विधायी धरोहर को बचाने का एक भावनात्मक प्रयास है। हमारी टीम ने यह सुनिश्चित किया कि लाखों पन्नों का इतिहास अब लोगों की उंगलियों पर हो।” सीएम हिमंत बिस्वा शर्मा ने भी सुमन शेखर के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे युवा उद्यमियों की बदौलत असम डिजिटल इनोवेशन में उत्तर-पूर्व का लीडर बन रहा है।

4 भाषाओं में पूछें सवाल, तुरंत मिलेगा जवाब

इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘बहुभाषी’ (Multilingual) होना है। यह असमिया, बोडो, हिंदी और अंग्रेजी—चारों भाषाओं में काम करता है। अब कोई भी विधायक, पत्रकार या शोधकर्ता अपनी मातृभाषा में सवाल पूछकर किसी भी पुराने कानून या नेता के भाषण की जानकारी सेकेंडों में हासिल कर सकता है।

तुलनात्मक अध्ययन हुआ आसान

अब यह पता लगाना चुटकियों का काम होगा कि 2010 में किसी मुद्दे पर क्या बहस हुई थी और 2020 में उस पर क्या रुख रहा। सिस्टम नेताओं की परफॉर्मेंस, कानूनों के इतिहास और ट्रेंड्स का गहरा विश्लेषण भी करता है। यह मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल दोनों पर उपलब्ध है।

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