सावधान! AI से बना फेक वीडियो डाला तो सीधे जेल: सरकार ने कसे नियम, 20 फरवरी से होगी सख्ती

अगर आप भी सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनी फोटो, वीडियो या ऑडियो शेयर करते हैं, तो अब संभल जाइए। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने डीपफेक और भ्रामक कंटेंट पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’ करते हुए नए कड़े नियम लागू कर दिए हैं।

प्रमुख बदलाव: अब बचना मुमकिन नहीं

सरकार का नया नियम साफ कहता है कि AI कंटेंट की ‘लेबलिंग’ अनिवार्य है। इसका मतलब है कि अगर आपने कोई कंटेंट AI की मदद से बनाया है, तो आपको स्पष्ट रूप से बताना होगा कि यह नकली है।

  • लेबल नहीं तो जेल: AI से बने कंटेंट पर कम से कम 10% हिस्से पर साफ वॉटरमार्क या लेबल होना जरूरी है।
  • तुरंत एक्शन: डीपफेक की शिकायत मिलने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अब 3 घंटे के भीतर उसे हटाना होगा (पहले यह समय 36 घंटे था)।
  • सेफ हार्बर खत्म: अगर फेसबुक, यूट्यूब या X (ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म इन नियमों को नहीं मानते, तो उनकी कानूनी सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी और उन पर भी मुकदमा चलेगा।

नियमों की लिस्ट: क्या बदलेगा 20 फरवरी से?

नियमविवरणसजा/परिणाम
अनिवार्य लेबलिंगAI कंटेंट पर वॉटरमार्क लगाना जरूरी।भारी जुर्माना और सीधा मुकदमा।
3-महीने की चेतावनीप्लेटफॉर्म हर तिमाही यूजर्स को नियमों की याद दिलाएगा।नियम अनदेखा करने पर पेनाल्टी डबल।
जीरो टॉलरेंसबच्चों का अश्लील कंटेंट, हिंसा या फर्जी दस्तावेज।तुरंत अकाउंट ब्लॉक और कानूनी कार्रवाई।
प्राइवेट कंटेंटबिना अनुमति किसी की निजी फोटो/वीडियो को AI से बदलना।गैर-जमानती अपराध की श्रे

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