भारत की जनगणना-2027: जयपुर में डिजिटल गणना की तैयारी शुरू, जानें कब से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक और क्या है ‘स्व-गणना’

जयपुर: भारत की आगामी जनगणना-2027 को लेकर राजस्थान में जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। जयपुर के जिला कलेक्ट्रेट में सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें प्रमुख जनगणना अधिकारी और जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने जनगणना के प्रथम चरण के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण का विधिवत उद्घाटन किया।

इस बार की जनगणना भारत के इतिहास में पहली ‘पूर्णतः डिजिटल’ गणना होने जा रही है, जिससे डेटा के विश्लेषण में न केवल तेजी आएगी बल्कि शुद्धता भी सुनिश्चित होगी।

1 मई से शुरू होगा प्रथम चरण: स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि जनगणना-2027 का पहला चरण (मकान सूचीकरण और मकान गणना) दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित होगा:

  1. स्व-गणना (1 मई – 15 मई): नागरिक स्वयं जनगणना पोर्टल या मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से अपने परिवार और मकान का विवरण दर्ज कर सकेंगे।
  2. फील्ड कार्य (16 मई – 14 जून): प्रगणक घर-घर जाकर उन लोगों का डेटा लेंगे जिन्होंने स्व-गणना नहीं की है।

आधुनिक तकनीक: जनगणना प्रबंधन पोर्टल और मोबाइल ऐप

जनगणना निदेशालय के संयुक्त निदेशक श्री अविनाश शर्मा ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल स्वरूप में होगी। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • CMMS पोर्टल: गणना के पर्यवेक्षण (Supervision) के लिए ‘जनगणना प्रबंधन एवं पर्यवेक्षण प्रणाली’ का उपयोग किया जाएगा।
  • मोबाइल एप्लीकेशन: प्रगणक अपने साथ कागजी फॉर्म के बजाय मोबाइल ऐप लेकर चलेंगे, जिससे रीयल-टाइम डेटा फीड किया जा सकेगा।
  • पारदर्शिता: डिजिटल होने से आंकड़ों में हेरफेर की गुंजाइश खत्म होगी और अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सटीक डेटा मिल सकेगा।

प्रशिक्षण में कलक्टर के कड़े निर्देश

कलक्टर डॉ. सोनी ने चार्ज स्तर (ग्रामीण) के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि जनगणना एक राष्ट्रीय महत्व का कार्य है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे तकनीकी बारीकियों को समझें और विशेष रूप से ‘Hands-on’ (प्रायोगिक अभ्यास) पर ध्यान दें ताकि फील्ड में डेटा अपलोड करते समय कोई समस्या न आए।

इस प्रशिक्षण शिविर में जिला जनगणना अधिकारी श्री संजय कुमार माथुर और संयुक्त निदेशक श्री बाबूलाल मीना सहित तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर के 40 अधिकारियों ने हिस्सा लिया।


निष्कर्ष: विकसित भारत के लिए सटीक आंकड़े

2027 की यह जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती नहीं है, बल्कि यह भविष्य की सरकारी नीतियों और बुनियादी ढांचे के विकास का आधार बनेगी। डिजिटल माध्यम अपनाने से सरकार के पास देश की बदलती जनसांख्यिकी का त्वरित और सटीक विश्लेषण मौजूद होगा।

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